लखनऊ / यूपी। प्रदेश सरकार ने राजस्व प्रशासन को जमीनी स्तर तक सुदृढ़ बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है। शासन द्वारा जारी नवीन निर्देशों में कहा गया है कि अब लेखपालों की तैनाती केवल कागज़ी रूप में नहीं, बल्कि वास्तविक निवास व कार्य व्यवस्था के साथ उनके हल्के के गांव या पंचायत क्षेत्र में ही की जाएगी। इसके लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत भवन में “लेखपाल कक्ष” विकसित किया जाएगा, जहाँ निर्धारित समय पर वे जनता के कार्यों के लिए उपलब्ध रहेंगे।
जिलाधिकारियों से कहा गया है कि पंचायत-वार स्थान उपलब्धता, मुख्यालय निर्धारण, गांवों की दूरी, आवागमन स्थिति तथा राजस्व अभिलेखों के निस्तारण से जुड़े बिंदुओं का ब्यौरा तैयार कर शासन के पोर्टल/गूगल शीट पर अपलोड किया जाए। इस डाटा के आधार पर नई कार्ययोजना लागू होगी।
सरकार का उद्देश्य ग्रामीण नागरिकों को राजस्व सेवाएँ उनके ही क्षेत्र में उपलब्ध कराना है, ताकि—
• आय / जाति / निवास प्रमाण पत्र
• भू-अभिलेख व खतौनी
• नामांतरण / पेंमाइश
• पट्टा संबंधी कार्य
जैसे मामलों को तहसील का चक्कर लगाए बिना निस्तारित किया जा सके।
अधिकारियों के अनुसार यह व्यवस्था वित्तीय वर्ष 2026-27 से चरणवार लागू होगी। ग्रामीण क्षेत्रों में लेखपाल की वास्तविक उपस्थिति बढ़ने से शिकायतों में कमी व सेवा-प्रदान में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

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