मुज़फ्फरनगर। 29 दिसंबर 2025 मुज़फ्फरनगर पुलिस के सर्विलांस सैल द्वारा चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन मोबाइल रिटर्न्स’ ने चार महीनों के भीतर एक ऐसी सफलता दर्ज की है, जिसने पुलिस की तकनीकी क्षमताओं और जनसेवा के प्रति उसके संकल्प — दोनों को नई पहचान दी है।
अभियान के दौरान टीम ने गुमशुदा व खोए हुए 171 स्मार्टफोन को बिहार, राजस्थान, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों से ट्रेस कर बरामद किया। बरामद मोबाइलों की कुल अनुमानित कीमत करीब ₹32 लाख आंकी गई है।

अभियान की शुरुआत — शिकायतों से बना मिशन

पिछले कुछ महीनों में बड़ी संख्या में नागरिकों ने
खोए हुए मोबाइल फोन के संबंध में आवेदन किया था।
कई मोबाइल
🔹 सिम बदलकर इस्तेमाल हो रहे थे
🔹 दूसरे राज्यों में बिक चुके थे
🔹 कुछ चोरी के नेटवर्क के ज़रिये ट्रांसफ़र हुए थे
इसी बढ़ते ट्रेंड को देखते हुए

👉 वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री संजय कुमार वर्मा
ने इसे एक सामान्य बरामदगी न मानकर
इसे स्पेशल ऑपरेशन का रूप दिया।

तकनीक और टीमवर्क का संयोजन
अभियान का संचालन
✔ अपर पुलिस महानिदेशक मेरठ ज़ोन
✔ पुलिस उपमहानिरीक्षक सहारनपुर परिक्षेत्र
के दिशा-निर्देश में हुआ।

मुख्य पर्यवेक्षण
👉 पुलिस अधीक्षक अपराध श्रीमती इन्दु सिद्धार्थ
👉 क्षेत्राधिकारी अपराध श्रीमती रूपाली राय चौधरी
ने संभाला।

टीम ने कार्यप्रणाली को पूरी तरह तकनीकी बनाया —
✔ CEIR (Central Equipment Identity Register) पोर्टल
✔ IMEI आधारित डिजिटल स्कैन
✔ उपयोग पैटर्न ट्रेसिंग
✔ डिवाइस लोकेशन हिस्ट्री
✔ इंटर-स्टेट पुलिस समन्वय
इन्हीं टूल्स के आधार पर
एक-एक मोबाइल को ट्रैक किया गया।
चार राज्य — दर्जनों लोकेशन — निरंतर पीछा
बरामदगी के दौरान फोन मिले—
📍 बिहार के शहरों से
📍 राजस्थान के अलग-अलग जनपदों से
📍 राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से
📍 उत्तर प्रदेश के कई जिलों से

कई मामलों में फोन
— सेकेंड हैंड मार्केट में बेचे जा चुके थे
— दूसरे यूज़र्स के पास चले गए थे
— लगातार सिम बदलकर चलाए जा रहे थे
लेकिन टीम हर बार
फिर से ट्रेसिंग शुरू करती रही।
यही इस ऑपरेशन की असली मेहनत रही।
मोबाइल सौंपते समय बदलीं कई ज़िंदगियाँ
आज आयोजित कार्यक्रम में SSP श्री संजय कुमार वर्मा ने
बरामद मोबाइल फोन उनके वास्तविक स्वामियों को सुपुर्द किए। कुछ नागरिकों की आँखों में खुशी झलक रही थी।
किसी ने कहा — फोन में हमारी बेटी की फोटो, डॉक्यूमेंट, बैंक पेपर — सब था…
ये सिर्फ मोबाइल नहीं, हमारी यादें वापस मिली हैं।

किसी बुज़ुर्ग ने यही कहा — ये पहली बार लगा कि पुलिस सिर्फ केस नहीं, भावनाएं भी समझती है।
हॉल में उपस्थित लोगों ने मुज़फ्फरनगर पुलिस की पहल को नए साल का सबसे बड़ा तोहफ़ा बताया।

ये ऑपरेशन क्यों खास है?
यह केवल मोबाइल बरामद करने की कार्रवाई नहीं थी
यह—
✔ डिजिटल अपराध पर ब्रेक
✔ चोरी के नेटवर्क पर निगरानी
✔ नागरिकों के विश्वास की पुनर्स्थापना
का प्रयास भी था।
वो टीम — जिसने मिशन को अंजाम तक पहुँचाया
1️⃣ प्रभारी निरीक्षक — श्री राजीव सिंह
2️⃣ हे0का0 कालूराम
3️⃣ हे0का0 मनीष त्यागी
4️⃣ हे0का0 राहुल सिरोही
5️⃣ हे0का0 विकास सिरोही
6️⃣ हे0का0 सुनील कुमार
7️⃣ का0 नितिन कुमार
इनकी
🔹 लगातार ट्रैकिंग
🔹 डाटा एनालिसिस
🔹 साइट वेरिफिकेशन
ने ऑपरेशन की सफलता सुनिश्चित की।

परिणाम सिर्फ बरामदगी नहीं — भरोसा भी लौटा
✔ नागरिकों में विश्वास बढ़ा
✔ डिजिटल रिकवरी सिस्टम मजबूत हुआ
✔ पुलिस-जनता सम्बन्ध और सुदृढ़ हुए
मुज़फ्फरनगर पुलिस का यह अभियान
टेक्नोलॉजी आधारित जनसेवा मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।

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