वाशिंगटन। वैश्विक ऊर्जा और व्यापार नीति से जुड़े मुद्दे पर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को लेकर तीखा बयान देते हुए संकेत दिया है कि यदि भारत रूस से कच्चे तेल का आयात जारी रखता है, तो अमेरिकी प्रशासन भारतीय उत्पादों पर लगने वाले आयात शुल्क (टैरिफ) में बढ़ोतरी कर सकता है। उनका कहना था कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालात में रूस के साथ ऊर्जा व्यापार अमेरिका की रणनीतिक नीति के खिलाफ है।
ट्रंप ने बातचीत के दौरान कहा कि भारत एक महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार है, लेकिन रूस से तेल खरीद के कारण अमेरिकी उद्योगों पर दबाव पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका पहले ही कई श्रेणियों में अतिरिक्त टैरिफ लागू कर चुका है और आवश्यकता पड़ने पर इसे आगे भी बढ़ाया जा सकता है। हालांकि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेतृत्व क्षमता की सराहना भी की, लेकिन स्पष्ट किया कि “अमेरिका अपने हितों के आधार पर निर्णय लेगा।”
विश्लेषकों का कहना है कि इस बयान का सीधा प्रभाव भारतीय वस्त्र, ऑटो-कंपोनेंट, फार्मा, समुद्री उत्पाद और रसायन क्षेत्र के निर्यातकों पर पड़ सकता है। कई विशेषज्ञ इसे रूस-यूक्रेन संघर्ष से जुड़ी वैश्विक कूटनीतिक खींचतान का हिस्सा मान रहे हैं, जहां ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार नीति एक साथ जुड़ती नजर आ रही है।
भारत की ओर से अभी आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन आर्थिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर नई वार्ता की संभावनाएं तेज हो सकती हैं।

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