लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आयोजित सहायक प्रोफेसर भर्ती परीक्षा को सरकार ने अनियमितताओं के संदेह के आधार पर निरस्त कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में हुई उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद यह निर्णय लेते हुए कहा कि किसी भी परीक्षा प्रणाली पर उठे सवालों को अनदेखा नहीं किया जाएगा और चयन प्रक्रियाओं को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाएगा।
यह परीक्षा उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज द्वारा आयोजित की गई थी। अभ्यर्थियों व शिकायतकर्ताओं द्वारा प्रश्नपत्र से जुड़ी गड़बड़ियों, संदिग्ध कॉन्टैक्ट नेटवर्क तथा कथित अवैध धन लेन-देन के आरोप उठाए गए थे। मामले पर की गई प्रारंभिक जाँच में कई बिंदुओं को गंभीर माना गया, जिसके बाद परीक्षा रद्द करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
सरकार ने आयोग को निर्देश दिया है कि परीक्षा का पुनः आयोजन सुरक्षित मॉडरेशन, डिजिटल निगरानी और कड़े नियंत्रण तंत्र के साथ किया जाए। साथ ही संदिग्ध व्यक्तियों की भूमिका को चिन्हित कर उनके विरुद्ध विधिक कार्रवाई की तैयारी भी की जा रही है।
अभ्यर्थियों ने निर्णय को स्वागत योग्य बताया और कहा कि इससे merit-based प्रणाली को मजबूती मिलेगी।
सूत्रों के अनुसार आगे सभी भर्ती परीक्षाओं के लिए पारदर्शिता बढ़ाने वाले नए प्रोटोकॉल लागू किए जा सकते हैं।

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