पटना, 3 फरवरी 26। बिहार विधानसभा में प्रस्तुत वर्ष 2026–27 के बजट में राज्य सरकार ने किसानों को सीधी आर्थिक राहत देने की महत्वपूर्ण घोषणा की है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में पेश इस बजट में खेती को अधिक लाभकारी बनाने और ग्रामीण आय को स्थिर करने पर विशेष जोर दिया गया। सरकार ने केंद्र सरकार की पीएम-किसान सम्मान निधि योजना के साथ राज्य स्तर पर अतिरिक्त सहायता जोड़ने का निर्णय लिया है, जिससे अब पात्र किसानों को पहले से अधिक वार्षिक आर्थिक सहयोग मिलेगा।
घोषणा के अनुसार अब तक किसानों को केंद्र की योजना से ₹6,000 प्रति वर्ष मिलते थे, लेकिन राज्य सरकार ने इसमें ₹3,000 की अतिरिक्त राशि जोड़ दी है। इस प्रकार अब प्रत्येक पात्र किसान को कुल ₹9,000 प्रतिवर्ष सीधे बैंक खाते में मिलेंगे। यह राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण प्रणाली के माध्यम से तीन किश्तों में भेजी जाएगी ताकि खेती के अलग-अलग मौसम में किसानों को नकद सहायता मिलती रहे। सरकार का मानना है कि इससे किसानों को बीज, खाद, सिंचाई और अन्य आवश्यक कृषि खर्चों के लिए समय पर धन उपलब्ध हो सकेगा।
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस योजना का लाभ उन्हीं किसानों को मिलेगा जिनका भूमि रिकॉर्ड और बैंक खाता विवरण सत्यापित है। जिला स्तर पर कृषि विभाग विशेष शिविर लगाकर ऐसे किसानों का पंजीकरण भी करेगा जो अभी तक किसी कारणवश योजना से नहीं जुड़ पाए हैं। इससे छोटे और सीमांत किसानों को प्राथमिकता देने की भी बात कही गई है।
बजट भाषण में केवल नकद सहायता ही नहीं, बल्कि कृषि ढांचे को मजबूत करने की भी घोषणा की गई। सिंचाई संसाधनों के विस्तार, डीजल अनुदान, पशुपालन और डेयरी क्षेत्र के प्रोत्साहन तथा ग्रामीण भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए अलग से धन प्रावधान किए गए हैं। मखाना, मक्का और बागवानी फसलों की प्रोसेसिंग इकाइयों को बढ़ावा देने की योजना भी बताई गई है, जिससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित नकद सहायता से किसानों की क्रय शक्ति बढ़ेगी, जिससे ग्रामीण बाजारों में व्यापारिक गतिविधियां तेज होंगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा। सरकार का उद्देश्य खेती को जोखिम से बचाते हुए किसानों की आय में स्थिरता लाना है। यदि यह योजना समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से लागू होती है, तो यह राज्य के कृषि क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकती है।
