मुज़फ्फरनगर। जिले की साइबर क्राइम पुलिस ने एक ऐसे संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो फर्जी कंपनियां रजिस्टर कराकर उनके नाम से जीएसटी नंबर जारी करवाता था और उन्हीं के आधार पर काल्पनिक बिलिंग व इनपुट टैक्स क्रेडिट के दुरुपयोग के जरिए सरकार के राजस्व को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुँचा रहा था। पुलिस ने दबिश देकर गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जबकि घोटाले से जुड़े अन्य लिंक और वित्तीय लेन-देन की छानबीन तेज कर दी गई है।
पुलिस के अनुसार गिरोह लंबे समय से अलग-अलग शहरों के पते दिखाकर नकली कंपनियां तैयार करता था, फिर डिजिटल सिग्नेचर के जरिए ऑनलाइन जीएसटी रजिस्ट्रेशन करवाया जाता था। इसके बाद उन्हीं कंपनियों के नाम पर बोगस खरीद-फरोख्त के बिल तैयार कर टैक्स समायोजन दिखाया जाता था, जबकि वास्तविक लेन-देन बिल्कुल नहीं होता था। इस तरीके से नेटवर्क द्वारा बड़े पैमाने पर फर्जी इनवॉइस तैयार कर करोड़ों रुपये की जीएसटी फ्रॉड बिलिंग की जा रही थी।
थाना साइबर क्राइम की टीम को इस नेटवर्क की गतिविधियों की गोपनीय जानकारी मिली, जिसके बाद टेक्निकल सर्विलांस और फील्ड इनपुट के आधार पर कार्रवाई करते हुए तीन आरोपितों को हिरासत में लिया गया। गिरफ्तार किए गए आरोपितों की पहचान अकरम पुत्र समीम निवासी थाना सिविल लाइन क्षेत्र, मोइन पुत्र फरीक उर्फ नदीम निवासी थाना सिविल लाइन क्षेत्र और मोहम्मद सफीक पुत्र मोहम्मद लियाकत अली निवासी ग्राम तिगरी थाना नई मंडी के रूप में हुई है। पूछताछ में आरोपितों ने माना कि वे कमीशन पर फर्जी कंपनियां खड़ी करते थे और उन्हें बिलिंग रैकेट से जोड़ देते थे।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से छह मोबाइल फोन, पाँच लैपटॉप, हार्ड डिस्क, इंटरनेट डोंगल, कई डिजिटल सिग्नेचर यूएसबी टोकन, कंपनियों के दस्तावेज, स्टाम्प, मोहर, सीलें तथा एक क्रेटा कार बरामद की है। बरामद उपकरणों से मिले डेटा में बड़ी संख्या में जीएसटी फाइलें, रिटर्न डिटेल, संदिग्ध इनवॉइस कॉपी और अकाउंट एक्सेस रिकॉर्ड मिलने की संभावना जताई गई है।
साइबर क्राइम पुलिस बरामद डिजिटल साक्ष्यों का फोरेंसिक परीक्षण करा रही है तथा संबंधित बैंक खातों, जीएसटी पोर्टल एंट्री, कॉल डिटेल रिकार्ड और आईपी लॉग का विश्लेषण कर रही है, ताकि घोटाले के पूरे नेटवर्क, सहयोगियों तथा लाभार्थी फर्मों तक पहुंचा जा सके। राजस्व हानि की कुल राशि का विस्तृत आंकलन भी किया जा रहा है, जो प्राथमिक जांच में करोड़ों रुपये बताई जा रही है।
पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी एवं आईटी एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि यह मामला बड़े स्तर के टैक्स फ्रॉड से जुड़ा प्रतीत होता है और जांच के दायरे का विस्तार कर अन्य राज्यों से भी समन्वय स्थापित किया जा रहा है।
