मुज़फ्फरनगर। जिले में सिंचाई विभाग के निर्माण कार्यों को लेकर विरोध तेज हो गया है। हाल ही में विभाग के अंतर्गत बनी सड़क कुछ ही दिनों में उखड़ जाने और डामर परत टूटकर अलग हो जाने के बाद विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालों का बड़ा दौर शुरू हो गया है। इस मामले में सामाजिक कार्यकर्ता एवं आरटीआई एक्टिविस्ट सुमित मलिक ने विभाग और उसके जिम्मेदार कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए अनिश्चितकालीन भूख-हड़ताल शुरू कर दी है।
कार्यकर्ता का आरोप है कि सिंचाई विभाग में वर्षों से एक ही जूनियर इंजीनियर JE उधम सिंह की तैनाती बनी हुई है, जिसके दौरान विभाग से जुड़े कई सड़क और निर्माण कार्यों में “मोटे वित्तीय हित” जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है। आरोप यह भी है कि ठेकेदारों को लाभ पहुँचाने के लिए सड़कें जल्दबाज़ी में और घटिया सामग्री से बनाई जाती हैं, जिसके कारण सड़कें कुछ ही दिनों में टूट जाती हैं, जबकि भुगतान लाखों रुपये में हो जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि नई बनी सड़क परत उखड़ने से जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं, जिससे आवागमन जोखिम भरा हो गया है। लोगों ने सवाल उठाया है कि यदि निर्माण मानक के अनुसार हुआ होता तो सड़क इतनी जल्दी खराब कैसे हो जाती।
सुमित मलिक ने मांग उठाई है कि सिंचाई विभाग के सड़क टेंडरों, भुगतान और निर्माण कार्यों की पारदर्शी समीक्षा की जाए तथा जिन परियोजनाओं में सड़क कमज़ोर पाई गई हो, उनमें जिम्मेदार व्यक्तियों पर जवाबदेही तय की जाए। उनका स्पष्ट कहना है कि सार्वजनिक धन पर चलने वाली परियोजनाएँ जनता के हक में टिकाऊ होनी चाहिए — न कि ठेकेदारी लाभ का माध्यम।
उनकी भूख-हड़ताल को ग्रामीणों और युवाओं का समर्थन मिल रहा है, वहीं लोग यह भी सवाल उठा रहे हैं कि एक ही JE की लगातार तैनाती आखिर किन कारणों से बरकरार रखी गई।
