लखनऊ। उत्तर प्रदेश में माफिया और संगठित अपराध से जुड़े नेटवर्क पर की जा रही कार्रवाई को लेकर प्रदेश सरकार ने कहा है कि विभिन्न जिलों में बीते वर्षों के दौरान अपराधियों की करीब पांच हजार करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की अवैध संपत्तियों को चिन्हित कर कुर्क, जब्त और ध्वस्त किया गया है। शासन स्तर से तैयार की गई रिपोर्ट के अनुसार अभियान का फोकस उन माफिया गिरोहों पर रहा, जिन्होंने दबाव, धमकी, अवैध कब्जों और आपराधिक गतिविधियों के जरिए संपत्ति अर्जित की थी।
रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस, राजस्व एवं जिला प्रशासन की संयुक्त टीमों ने गैंगस्टर एक्ट सहित विभिन्न कानूनी प्रावधानों के तहत चल-अचल संपत्तियों का सत्यापन किया और जहां अवैध कब्जा या संदिग्ध लेनदेन पाया गया, वहाँ कुर्की व ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। इस दौरान कई स्थानों पर भू-माफिया के कब्जे से जमीनें मुक्त कराई गईं, जबकि कुछ जिलों में वाणिज्यिक भवन, प्लॉट और अवैध निर्माण गिराए गए।
अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई केवल दंडात्मक स्तर पर सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य अपराध के आर्थिक ढांचे को कमजोर करना है, क्योंकि अवैध कमाई और संपत्ति के माध्यम से ही माफिया अपनी गतिविधियों को बनाए रखते थे। कई मामलों में जब्त संपत्तियों को राजस्व रिकॉर्ड में सरकारी अभिलेख के रूप में दर्ज किया गया है।
शासन का दावा है कि सख्त कार्रवाई के चलते अपराधियों का दबदबा कमजोर हुआ है और प्रशासनिक तंत्र को अवैध कब्जों व आर्थिक अपराधों के खिलाफ तेजी से हस्तक्षेप करने का अवसर मिला है। सरकार ने संकेत दिया है कि आगे भी संदिग्ध संपत्तियों की पहचान कर इसी प्रकार की कार्रवाई जारी रहेगी।
सरकारी सूत्रों के अनुसार इस अभियान को कानून और न्यायिक प्रक्रिया के तहत संचालित किया जा रहा है तथा प्रत्येक प्रकरण में साक्ष्य और दस्तावेजों के आधार पर ही निर्णय लिया जा रहा है, ताकि कार्रवाई कानूनी रूप से टिकाऊ और पारदर्शी रहे।
