लखनऊ में Bank of Baroda की एक शाखा के मैनेजर पर सालों पुराने रिश्वत प्रकरण में आखिरकार न्यायालय का बड़ा फैसला आया है। भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत चले इस मामले में अदालत ने शाखा प्रबंधक राम स्वरूप मिश्रा को दोषी मानते हुए 5 वर्ष की कैद और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
जानकारी के मुताबिक यह पूरा मामला वर्ष 2017 में शुरू हुआ था, जब बैंक की “कामधेनु योजना” के तहत स्वीकृत किए गए एक लोन खाते को मैनेजर ने अचानक रोक दिया था। शिकायतकर्ता जब कारण पूछने पहुंचे, तो उन पर खाते से जुड़े कार्य को आगे बढ़ाने के एवज में रिश्वत की मांग का आरोप लगा। इसी शिकायत के बाद सीबीआई ने मामले में ट्रैप लगाया और जांच आगे बढ़ाई।
सीबीआई के अनुसार लोन का एक हिस्सा खाते में पहुंच चुका था, लेकिन मैनेजर ने जानबूझकर प्रक्रिया रोककर लाभार्थी पर दबाव बनाया। बाद में कथित तौर पर 25 हजार रुपये लेने की सहमति हुई, जिसके बाद निरीक्षण में महत्वपूर्ण सबूत सामने आए।
लंबी सुनवाई और गवाहों के बयान दर्ज होने के बाद अदालत ने अपने फैसले में माना कि आरोपी अधिकारी ने अपने पद का दुरुपयोग किया और पीड़ित से अवैध रूप से धन लेने का प्रयास किया। अदालत ने कहा कि इस तरह के अपराध बैंकिंग व्यवस्था में लोगों के विश्वास को कमजोर करते हैं, इसलिए सख्त सजा आवश्यक है।
