संभल/मुरादाबाद। संभल में 24 नवंबर को हुई हिंसा से जुड़े मामले में अदालत के आदेश ने पुलिस महकमे में हलचल मचा दी है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय ने तत्कालीन ASP/सीओ संभल अनुज चौधरी, इंस्पेक्टर अनुज तोमर सहित लगभग 20 पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
मामला नखासा थाना क्षेत्र के खग्गू सराय निवासी यामीन की याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि उनका पुत्र आलम, जो रोजमर्रा की तरह काम पर निकला था, शाही जामा मस्जिद क्षेत्र में हुए बवाल के दौरान गोली लगने से घायल हो गया। परिजनों का दावा है कि गोली पुलिस फायरिंग में लगी, जबकि युवक किसी भी उपद्रव में शामिल नहीं था।
याचिका में यह भी कहा गया कि भय और कथित दबाव के कारण घायल युवक का इलाज सरकारी अस्पताल में न कराकर निजी स्तर पर कराया गया। अदालत ने प्रस्तुत तथ्यों, चिकित्सकीय दस्तावेजों और बयानो को संज्ञान में लेते हुए मुकदमा दर्ज कराने का आदेश दिया।
दूसरी ओर, पुलिस प्रशासन का कहना है कि घटना की न्यायिक जांच पहले ही पूरी हो चुकी है और पुलिसकर्मियों की भूमिका सही पाई गई थी। कृष्ण कुमार बिश्नोई, पुलिस अधीक्षक संभल, ने बताया कि अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया जाएगा।
यह मामला अब न केवल कानूनी बल्कि प्रशासनिक दृष्टि से भी अत्यंत संवेदनशील माना जा रहा है।
