मुज़फ्फरनगर। पिन्ना रजवाहे के किनारे बनाई गई सड़क अब विकास नहीं बल्कि भ्रष्टाचार की पहचान बनती जा रही है। करोड़ों के दावे और गुणवत्ता के वादों के बीच बनी यह सड़क आठ दिन भी नहीं टिक सकी, जिससे सिंचाई विभाग और ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण के दौरान न तो बेस मजबूत किया गया और न ही मानक सामग्री का उपयोग हुआ। पहली ही बारिश और हल्के आवागमन में सड़क की सतह उखड़ने लगी। स्थानीय किसान सुमित मलिक ने वीडियो और फोटो साक्ष्यों के साथ उच्चाधिकारियों को शिकायत भेजते हुए इसे सरकारी धन की खुली लूट बताया है।
उनका कहना है कि सड़क निर्माण का उद्देश्य किसानों को सुविधा देना था, लेकिन घटिया निर्माण के कारण अब खेतों तक ट्रैक्टर ले जाना भी मुश्किल हो गया है। इससे फसलों की ढुलाई और सिंचाई दोनों प्रभावित हो रही हैं।
मामले के तूल पकड़ने पर सीडीओ कमल किशोरी कंडारकर ने विभागीय अधिकारियों के साथ स्थल निरीक्षण किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्माण से जुड़े सभी अभिलेखों की जांच कराई जाएगी और यदि भ्रष्टाचार या लापरवाही पाई गई तो संबंधित अधिकारी और ठेकेदार के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे।
ग्रामीणों ने मांग की है कि सड़क का पुनः निर्माण दोषियों के खर्च पर कराया जाए और भविष्य में इस प्रकार के घोटालों पर रोक लगाने के लिए ठोस व्यवस्था की जाए।
