लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने अपने जन्मदिन के मौके पर जो संदेश दिया, उसे राजनीतिक हलकों में ब्राह्मण समाज की ओर बढ़ाया गया सुनियोजित कदम माना जा रहा है। सीधे नाम लिए बिना उन्होंने साफ किया कि उत्तर प्रदेश में सिर्फ एक जाति या वर्ग की राजनीति टिकाऊ नहीं हो सकती, बल्कि सामाजिक संतुलन ही सत्ता की असली कुंजी है।
मायावती ने कहा कि बसपा की पहचान हमेशा “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” की रही है और इसी सोच ने प्रदेश को पहले भी स्थिर सरकार दी थी। उन्होंने संकेतों में कहा कि जिन वर्गों को आज सत्ता में रहते हुए सिर्फ “उपयोग” की राजनीति तक सीमित कर दिया गया है, उन्हें अपने सम्मान, भागीदारी और निर्णय की भूमिका पर दोबारा विचार करना चाहिए।
अपने संदेश में उन्होंने जोर देकर कहा कि ब्राह्मण समाज शिक्षित, जागरूक और नीति निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला वर्ग रहा है, लेकिन आज उसकी अपेक्षाओं को भी दरकिनार किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि बसपा की सरकार में कभी किसी वर्ग के साथ भेदभाव नहीं हुआ और कानून-व्यवस्था से लेकर प्रशासन तक योग्यता और संतुलन के आधार पर फैसले लिए गए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मायावती का यह बयान उस समय आया है, जब प्रदेश में ब्राह्मण मतदाता खुद को असहज और हाशिए पर महसूस कर रहा है। जन्मदिन जैसे अवसर पर दिया गया यह संदेश सीधे तौर पर यह संकेत देता है कि बसपा एक बार फिर दलित–ब्राह्मण सामाजिक समीकरण को जीवित करने की रणनीति पर काम कर रही है।
मायावती ने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे समाज के हर वर्ग, खासकर ब्राह्मण, पिछड़े और अल्पसंख्यक समाज के बीच जाकर यह बताएं कि बसपा की राजनीति टकराव नहीं, सहयोग और सम्मान पर आधारित है। उन्होंने चेताया कि नफरत और विभाजन की राजनीति ने प्रदेश को सिर्फ अस्थिरता दी है।
जन्मदिन पर उन्होंने स्पष्ट किया कि यह उत्सव का नहीं, बल्कि राजनीतिक दिशा तय करने का दिन है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में बसपा संतुलित सामाजिक गठबंधन के साथ मैदान में उतरेगी और वही ताकतें आगे आएंगी, जो हर वर्ग को साथ लेकर चलने में विश्वास रखती हैं।

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