गोंडा। उत्तर प्रदेश के गोंडा मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य सेवाओं की हालत एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। अस्पताल के अंदर से सामने आए वीडियो और तस्वीरों ने चिकित्सा व्यवस्था, सफाई और सुरक्षा इंतजामों की पोल खोलकर रख दी है। मरीजों के वार्ड में खुलेआम चूहे दौड़ते दिखे और उसके कुछ ही दिनों बाद आवारा कुत्ते भी अस्पताल के बेड पर आराम करते नजर आए। इस घटना के बाद मरीज, तीमारदार और स्थानीय लोग अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि मेडिकल कॉलेज के ऑर्थोपेडिक वार्ड से पहले एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें बड़े-बड़े चूहे मरीजों के बेड के पास, दवाइयों की टेबल पर और ऑक्सीजन पाइपलाइन के आसपास घूमते दिखाई दिए। कुछ मरीजों ने बताया कि रात के समय चूहे बिस्तरों पर चढ़ने की कोशिश करते हैं, जिससे मरीज डर जाते हैं और चैन से सो भी नहीं पाते। कई तीमारदारों ने यह भी शिकायत की कि चूहे खाने-पीने का सामान कुतर देते हैं और वार्ड में गंदगी फैला देते हैं, लेकिन इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
अभी यह मामला ठंडा भी नहीं पड़ा था कि एक और वीडियो सामने आ गया, जिसमें अस्पताल के अंदर एक वार्ड के खाली बेड पर आवारा कुत्ते आराम फरमाते दिखे। वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि कुत्ते बिना किसी रोक-टोक के अस्पताल के भीतर घूम रहे हैं, जबकि पास ही मरीज भर्ती हैं। इससे यह साफ जाहिर होता है कि अस्पताल परिसर में प्रवेश नियंत्रण और निगरानी व्यवस्था बेहद कमजोर है। मरीजों का कहना है कि अगर अस्पताल में कुत्ते और चूहे खुलेआम घूमेंगे तो इलाज से ज्यादा बीमारी फैलने का खतरा बढ़ जाएगा।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि मेडिकल कॉलेज प्रशासन सफाई और पेस्ट कंट्रोल को लेकर गंभीर नहीं है। नियमित सफाई नहीं होती, कूड़ा-कचरा खुले में पड़ा रहता है और वार्डों में चूहे पकड़ने के लिए भी कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं दिखती। कई परिजनों ने कहा कि उन्होंने पहले भी शिकायत की थी, लेकिन उनकी बात को नजरअंदाज कर दिया गया।
मामला वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन हरकत में आया है। अधिकारियों ने अस्पताल प्रबंधन को तत्काल पेस्ट कंट्रोल कराने, वार्डों की गहन सफाई करने और आवारा जानवरों की रोकथाम के लिए सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह भी कहा गया है कि लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाएगी। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सब पहले ही हो जाना चाहिए था, तब स्थिति इतनी खराब नहीं होती।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पताल जैसे स्थान पर चूहों और कुत्तों की मौजूदगी बेहद खतरनाक है, क्योंकि इससे संक्रमण फैलने का गंभीर खतरा रहता है, खासकर उन मरीजों के लिए जिनकी हालत पहले से नाजुक है। यह घटना सिर्फ गोंडा मेडिकल कॉलेज की नहीं, बल्कि सरकारी अस्पतालों में फैली अव्यवस्था की बड़ी तस्वीर दिखाती है।
फिलहाल यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग सोशल मीडिया पर सवाल उठा रहे हैं कि जब सरकारी मेडिकल कॉलेज का यह हाल है तो आम मरीज सुरक्षित इलाज की उम्मीद कैसे करें। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाता है और व्यवस्था में कितना सुधार होता है।
