मुज़फ़्फ़रनगर। वाराणसी स्थित मणिकर्णिका घाट पर चल रहे विकास एवं पुनर्निर्माण कार्यों को लेकर उठा विवाद अब जनपद मुज़फ़्फ़रनगर तक पहुंच गया है। मंगलवार को पाल समाज से जुड़े सैकड़ों लोगों ने मुज़फ़्फ़रनगर कलेक्ट्रेट परिसर में एकत्र होकर प्रशासन के माध्यम से केंद्र सरकार तक अपनी बात पहुंचाई।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मणिकर्णिका घाट केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि आस्था, परंपरा और इतिहास का प्रतीक है। समाज के लोगों ने आरोप लगाया कि विकास कार्यों के नाम पर घाट से जुड़ी प्राचीन संरचनाओं और धार्मिक चिह्नों को नुकसान पहुंचाया गया, जिसे किसी भी रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
प्रदर्शन के दौरान पाल समाज के पदाधिकारियों ने प्रधानमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, दोषियों की जवाबदेही तय करने और भविष्य में धार्मिक स्थलों पर किसी भी कार्य से पहले समाज की सहमति लेने की मांग की गई। इसके साथ ही पूर्व में हुए आंदोलनों के दौरान दर्ज मुकदमों को वापस लेने और कथित लाठीचार्ज की जांच की भी मांग उठाई गई।
ज्ञापन सौंपने के बाद समाज के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी से मुलाकात की। जिलाधिकारी ने ज्ञापन शासन तक भेजने और नियमानुसार कार्रवाई का भरोसा दिलाया। पूरे प्रदर्शन के दौरान पुलिस बल तैनात रहा और स्थिति पूरी तरह शांतिपूर्ण बनी रही।

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