मुजफ्फरनगर। मुख्यमंत्री के वृक्षारोपण अभियान और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों के बीच बेलड़ा कोठी क्षेत्र में 111 हरे-भरे पेड़ों की कटाई की अनुमति दिए जाने का मामला सामने आया है। पेड़ों की कटाई को लेकर किसान सेवक विनीत त्यागी और आंदोलन से जुड़े लोगों ने आपत्ति जताते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। इस संबंध में जिलाधिकारी को पत्र भेजकर अनुमति प्रक्रिया की समीक्षा कराने का आग्रह किया गया है।आंदोलन से जुड़े लोगों के अनुसार, बेलड़ा कोठी क्षेत्र में 76 हरे-भरे, छायादार और फलदार पेड़ों के अलावा सिंचाई विभाग की कॉलोनियों में लगे 35 पेड़ों को काटने की अनुमति दी गई है। उनका कहना है कि पेड़ों की कटाई से क्षेत्र के पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसी को लेकर अनुमति दिए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं। लोगों ने मांग की है कि पेड़ों की कटाई की आवश्यकता और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन करने के बाद ही कोई निर्णय लिया जाए।किसान सेवक विनीत त्यागी ने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर मामले की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पेड़ों को काटने की अनुमति किन परिस्थितियों में दी गई, इसकी जानकारी सामने आनी चाहिए। साथ ही, अनुमति देने की प्रक्रिया में पर्यावरणीय नियमों और सरकारी निर्देशों का पालन हुआ है या नहीं, इसकी भी जांच की जानी चाहिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों की भूमिका की समीक्षा करने का आग्रह किया है।पेड़ों की कटाई के विरोध में आंदोलन से जुड़े लोगों ने 24 सितंबर से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से पेड़ बचाओ, चिपको आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है। आंदोलनकारियों का कहना है कि 111 पेड़ों की सुरक्षा के लिए हरसंभव लोकतांत्रिक प्रयास किया जाएगा। उन्होंने मेरठ क्षेत्र में कोठी गंगा और चितौड़ा झील के आसपास पूर्व में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई को लेकर उठे सवालों का भी उल्लेख किया।आंदोलनकारियों का कहना है कि एक ओर सरकार वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण को लेकर अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर हरे-भरे पेड़ों की कटाई की अनुमति दिए जाने से विरोधाभास की स्थिति बन रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, पेड़ों की कटाई की अनुमति की समीक्षा करने और यदि नियमों की अनदेखी सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। साथ ही, पेड़ों की कटाई वास्तव में आवश्यक है या नहीं, इसकी भी जांच कराने का आग्रह किया गया है।