बालाघाट। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के आदिवासी इलाकों में रहस्यमयी बीमारी से बच्चों की मौत का सिलसिला जारी है। 26 जून से 11 अगस्त तक आठ बच्चों की मौत हो चुकी है। इनमें तीन वर्षीय प्रियंका धुर्वे की मौत मंगलवार रात जिला अस्पताल में उपचार के दौरान हुई। जबलपुर मेडिकल कॉलेज और बालाघाट के चिकित्सकों की टीम प्रभावित गांवों का दौरा कर जांच कर चुकी है, लेकिन अब तक बच्चों की मौत की निश्चित वजह सामने नहीं आ सकी है।मामला मुख्य रूप से बिरसा विकासखंड की अडोरी और मछुरदा पंचायत के आदिवासी बहुल गांवों से जुड़ा है। प्रभावित बच्चों में बुखार, निमोनिया, खून की कमी, शरीर में पानी की कमी, त्वचा पर चकत्ते व खुजली जैसे अलग-अलग लक्षण पाए गए हैं। कुछ बच्चों में मलेरिया, फंगल संक्रमण और किडनी पर असर जैसे लक्षण भी सामने आए हैं।जबलपुर मेडिकल कॉलेज और बालाघाट के चिकित्सकों की टीम ने प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर बच्चों की जांच की। चिकित्सकों के अनुसार बच्चों में कई तरह के रोगों के लक्षण मिलने के कारण बीमारी की एक निश्चित वजह बताना अभी संभव नहीं है। जांच के लिए बच्चों के नमूने पुणे स्थित प्रयोगशाला भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद बीमारी के वास्तविक कारण की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।जानकारी के अनुसार 26 जून से अब तक जिन बच्चों की मौत हुई है, उनमें लमानीन धुर्वे, साहिल धुर्वे, पूजा धुर्वे, सचिन मरकाम, प्रीति मरकाम, अरविंद धुर्वे, मंगली मरकाम और प्रियंका धुर्वे शामिल हैं। प्रियंका की मौत 11 अगस्त की रात हुई। लगातार मौतों के बाद स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित गांवों में निगरानी और उपचार की व्यवस्था बढ़ाई है।स्वास्थ्य विभाग की ओर से गंभीर रूप से बीमार बच्चों की पहचान कर उनका उपचार कराया जा रहा है। कई बच्चों के स्वस्थ होने के बाद उन्हें घर भेजा जा चुका है, जबकि कुछ बच्चों का उपचार जारी है। चिकित्सकीय दल प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर बच्चों की स्थिति पर नजर रख रहे हैं।स्थानीय स्तर पर यह बात भी सामने आई है कि कुछ परिवार बीमारी की शुरुआती अवस्था में अस्पताल पहुंचने के बजाय पारंपरिक उपचार का सहारा लेते हैं। इससे उपचार में देरी की आशंका जताई गई है। हालांकि, बच्चों की मौत का वास्तविक कारण अभी जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।मामले को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर राज्यस्तरीय जांच कराने, लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करने और मृत बच्चों के परिवारों को आर्थिक सहायता देने की मांग की है। उन्होंने गंभीर रूप से बीमार बच्चों को बड़े चिकित्सा केंद्रों में उपचार उपलब्ध कराने की मांग भी की है।फिलहाल स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सकीय दल की जांच जारी है। बीमारी के कारणों का पता लगाने के लिए भेजे गए नमूनों की जांच रिपोर्ट को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इन बच्चों में बीमारी फैलने और मौतों के पीछे वास्तविक कारण क्या है।

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