यरूशलम/नई दिल्ली। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इज़रायल की संसद में आयोजित विशेष समारोह में वहां का सर्वोच्च संसदीय सम्मान “स्पीकर ऑफ द केनेसट मेडल” प्रदान किया गया। सम्मान ग्रहण करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह सम्मान उनके लिए व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत और इज़रायल के बीच दशकों से विकसित होते आ रहे विश्वास और मित्रता का प्रतीक है।
सम्मान समारोह इज़रायल की राजधानी Jerusalem में केनेसट भवन में आयोजित हुआ, जहां इज़रायल के शीर्ष सांसदों और गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति में यह अलंकरण दिया गया। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के साथ इज़रायल के वरिष्ठ नेताओं ने भी भारत-इज़रायल संबंधों की मजबूती और आपसी सहयोग को सराहा।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और इज़रायल के संबंध केवल कूटनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि नवाचार, कृषि तकनीक, जल प्रबंधन, रक्षा सहयोग और स्टार्टअप इकोसिस्टम जैसे क्षेत्रों में भी नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि दोनों देशों के बीच बढ़ता व्यापार और साझा तकनीकी परियोजनाएं भविष्य की साझेदारी को और मजबूत करेंगी।
प्रधानमंत्री ने इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ हुई वार्ता का भी जिक्र किया, जिसमें क्षेत्रीय सुरक्षा, निवेश, साइबर सुरक्षा और उभरती तकनीकों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।
विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, यह सम्मान उन अंतरराष्ट्रीय नेताओं को दिया जाता है जिन्होंने इज़रायल के साथ संबंधों को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाई हो। प्रधानमंत्री मोदी इस सम्मान को प्राप्त करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बन गए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बदलते सामरिक समीकरणों के बीच यह सम्मान भारत की संतुलित और सक्रिय विदेश नीति का संकेत है। भारत एक ओर इज़रायल के साथ घनिष्ठ संबंध रखता है तो दूसरी ओर क्षेत्र के अन्य देशों के साथ भी सामंजस्य बनाए हुए है।
कार्यक्रम के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “भारत और इज़रायल की दोस्ती लोकतांत्रिक मूल्यों, नवाचार की भावना और साझा आकांक्षाओं पर आधारित है। यह सम्मान 140 करोड़ भारतीयों को समर्पित है।”
इस अवसर को भारत-इज़रायल कूटनीतिक संबंधों के इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है, जो आने वाले समय में दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और गति दे सकता है।
