तेहरान में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन की खबर फैलते ही पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया के कई देशों में अमेरिका के खिलाफ गुस्से की लहर देखी गई। विभिन्न स्थानों पर अमेरिकी दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों के बाहर बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे और विरोध प्रदर्शन किए।
सबसे तीखा प्रदर्शन पाकिस्तान के कराची शहर में देखने को मिला, जहां प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी वाणिज्य दूतावास की ओर मार्च किया। पुलिस और भीड़ के बीच झड़प की स्थिति बनी, जिसके बाद हालात को काबू में करने के लिए सुरक्षा बलों को आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा। लाहौर और इस्लामाबाद में भी अमेरिकी दूतावासों के आसपास कड़ी सुरक्षा के बीच नारेबाजी की गई।
इराक की राजधानी बगदाद में ग्रीन ज़ोन स्थित अमेरिकी दूतावास के बाहर बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए। प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका और इज़राइल के खिलाफ नारे लगाए और ईरान के समर्थन में पोस्टर व बैनर लहराए। सुरक्षा एजेंसियों ने एहतियातन दूतावास परिसर के आसपास अतिरिक्त बल तैनात कर दिया।
लेबनान की राजधानी बेरूत में भी अमेरिकी दूतावास के बाहर विरोध जताया गया। यहां प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन माहौल तनावपूर्ण बना रहा।
इसके अलावा सीरिया के दमिश्क और यमन की राजधानी सना में भी अमेरिकी नीतियों के विरोध में रैलियां निकाली गईं। हालांकि इन स्थानों पर दूतावासों की सुरक्षा पहले से ही कड़ी होने के कारण प्रदर्शन सीमित क्षेत्र तक ही रहे।
भारत के जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में भी कुछ समूहों ने सड़कों पर उतरकर विरोध दर्ज कराया, हालांकि यहां अमेरिकी दूतावास को सीधे निशाना नहीं बनाया गया।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इन प्रदर्शनों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। कई देशों में अमेरिकी मिशनों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है और स्थानीय प्रशासन सतर्क मोड में है। विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्रीय राजनीति और वैश्विक शक्ति संतुलन पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है।
स्थिति पर दुनिया भर की नजरें टिकी हैं और आने वाले दिनों में कूटनीतिक हलचल तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
