नई दिल्ली। देश में तकनीकी शिक्षा को रोजगार के अधिक अवसरों से जोड़ने के उद्देश्य से आईटीआई (औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान) की व्यवस्था में व्यापक बदलाव किए जाने की तैयारी की गई है। केंद्र सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय ने आईटीआई संस्थानों को आधुनिक तकनीक और उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने की योजना शुरू की है, जिससे प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं को सीधे रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें।
सरकारी सूत्रों के अनुसार देश के विभिन्न राज्यों में संचालित हजारों आईटीआई संस्थानों में से बड़ी संख्या में संस्थानों को चरणबद्ध तरीके से आधुनिक मशीनों, डिजिटल उपकरणों और उन्नत प्रशिक्षण सुविधाओं से लैस किया जाएगा। इसके तहत कई पुराने ट्रेडों को अपडेट किया जाएगा, जबकि उद्योगों की वर्तमान मांग को देखते हुए नए ट्रेड भी शुरू किए जाएंगे।
नई व्यवस्था के अंतर्गत आईटीआई छात्रों को अब केवल कक्षा में सैद्धांतिक प्रशिक्षण ही नहीं दिया जाएगा, बल्कि उन्हें औद्योगिक इकाइयों और कंपनियों में व्यावहारिक प्रशिक्षण से भी जोड़ा जाएगा। इसके लिए कई संस्थानों को स्थानीय उद्योगों और कंपनियों के साथ साझेदारी में संचालित करने की योजना तैयार की गई है, जिससे प्रशिक्षण के दौरान ही छात्रों को वास्तविक कार्य अनुभव मिल सके।
कौशल विकास मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि इस पहल के तहत कुछ प्रमुख आईटीआई संस्थानों को “हब” के रूप में विकसित किया जाएगा, जबकि आसपास के अन्य संस्थानों को उनसे जोड़ा जाएगा। इस मॉडल के माध्यम से छात्रों को आधुनिक उपकरणों पर प्रशिक्षण और विशेषज्ञ प्रशिक्षकों से मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा।
नई नीति में डिजिटल तकनीक, रोबोटिक्स, इलेक्ट्रिक वाहन, सोलर ऊर्जा, ऑटोमेशन तथा आधुनिक औद्योगिक कौशल से जुड़े पाठ्यक्रमों को भी शामिल करने पर जोर दिया गया है। इसके साथ ही छात्रों को उद्यमिता, संचार कौशल और कार्यस्थल अनुशासन से संबंधित प्रशिक्षण भी दिया जाएगा, ताकि वे नौकरी के साथ-साथ स्वरोजगार के लिए भी तैयार हो सकें।
सरकार का मानना है कि इस बदलाव से देशभर के लाखों युवाओं को लाभ मिलेगा और आईटीआई से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की रोजगार क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। विशेषज्ञों के अनुसार यदि योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है तो आने वाले वर्षों में आईटीआई संस्थान देश में कौशल आधारित रोजगार के प्रमुख केंद्र बन सकते हैं।
