मुजफ्फरनगर। कृषि विज्ञान केंद्र चितौड़ा में आयोजित दो दिवसीय कृषक वैज्ञानिक संवाद में किसानों और कृषि विशेषज्ञों के बीच सीधा संवाद हुआ। वैज्ञानिकों ने किसानों की फसलों से जुड़ी समस्याओं को सुना और कीट-रोग प्रबंधन, फसल सुरक्षा, सहफसली खेती तथा उद्यानिकी फसलों की देखभाल के संबंध में वैज्ञानिक उपाय बताए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया।कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों और वैज्ञानिक पद्धतियों को किसानों तक पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित संवाद में कृषि वैज्ञानिकों एवं कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को खेती की समस्याओं का वैज्ञानिक तरीके से समाधान करने के लिए प्रेरित किया। किसानों से उनकी फसलों की स्थिति और सामने आ रही परेशानियों के बारे में जानकारी ली गई तथा संबंधित समस्याओं के समाधान के उपाय बताए गए।संवाद के दौरान जानसठ विकासखंड के गांव बहेड़ा अस्सा निवासी किसान ब्रजपाल सिंह ने गन्ने की फसल से संबंधित समस्या कृषि विशेषज्ञों के समक्ष रखी। किसानों की समस्या पर उप कृषि निदेशक प्रमोद सिरोही ने समेकित कीट प्रबंधन अपनाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने खेत की नियमित निगरानी करने तथा फसल में कीट या रोग की स्थिति दिखाई देने पर आवश्यकता के अनुसार अनुशंसित कृषि रसायनों का ही प्रयोग करने पर जोर दिया।उन्होंने किसानों को कृषि रसायनों के सुरक्षित और उचित इस्तेमाल के प्रति भी जागरूक किया। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि कीटनाशकों का प्रयोग फसल की अवस्था, कीट या रोग की स्थिति और अनुशंसित मात्रा के अनुसार ही किया जाना चाहिए। इससे अनावश्यक रसायनों के प्रयोग से बचने के साथ फसल की सुरक्षा में भी मदद मिल सकती है।कृषि विज्ञान केंद्र चितौड़ा के कृषि वैज्ञानिक डा. संजीव लांबा ने गन्ने की खेती के साथ सहफसली खेती अपनाने की सलाह दी। उन्होंने किसानों को सहफसली खेती से संबंधित जरूरी जानकारी देने के साथ फसल सुरक्षा के उपायों पर भी चर्चा की। किसानों को फेरोमोन जाल के उपयोग के बारे में बताया गया और फसलों में कीटों की निगरानी को महत्वपूर्ण बताया गया।संवाद कार्यक्रम में उद्यानिकी फसलों की खेती करने वाले किसानों ने फलों के असमय गिरने की समस्या भी कृषि वैज्ञानिकों के सामने रखी। किसानों की इस समस्या पर कृषि विज्ञान केंद्र चितौड़ा के कृषि वैज्ञानिक डा. यशपाल ने विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने फलों के असमय गिरने की समस्या से संबंधित आवश्यक उपायों और फसल प्रबंधन के संबंध में किसानों को जानकारी उपलब्ध कराई।कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों से खेती में वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाने और फसलों की नियमित निगरानी करने की आवश्यकता पर जोर दिया। संवाद का उद्देश्य किसानों की वास्तविक समस्याओं को कृषि विशेषज्ञों तक पहुंचाने के साथ उनके समाधान के लिए वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध कराना रहा।कार्यक्रम के दौरान किसानों को यह भी समझाया गया कि फसल में किसी भी प्रकार के कीट या रोग की समस्या सामने आने पर बिना आवश्यकता कृषि रसायनों का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। फसल की अवस्था और समस्या के अनुरूप अनुशंसित उपाय अपनाना अधिक उचित है। इस दौरान किसानों की ओर से पूछे गए सवालों पर कृषि वैज्ञानिकों ने आवश्यक जानकारी दी।दो दिवसीय कार्यक्रम में किसानों की सक्रिय भागीदारी रही। गन्ने की फसल से लेकर उद्यानिकी फसलों तक किसानों ने अपनी समस्याएं विशेषज्ञों के सामने रखीं। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए वैज्ञानिक जानकारी साझा की और फसल सुरक्षा तथा बेहतर कृषि प्रबंधन के उपायों से अवगत कराया। कार्यक्रम के माध्यम से किसानों और कृषि वैज्ञानिकों के बीच सीधे संवाद को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया।

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