मुजफ्फरनगर। सदर तहसील क्षेत्र के सादपुर गांव में जमीन को लेकर विवाद गहरा गया है। रविवार को बड़ी संख्या में महिलाएं कलेक्ट्रेट पहुंचीं और प्रदर्शन कर विवादित भूमि से संबंधित शिकायत अधिकारियों के सामने रखने का प्रयास किया। ग्रामीणों का आरोप है कि जिस जमीन को लेकर मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में विचाराधीन है और स्थगन आदेश भी है, वहां जेसीबी से काम कर रास्ते को प्रभावित करने की कोशिश की गई।ग्रामीणों के मुताबिक विवाद खसरा संख्या 990 की भूमि को लेकर है। उनका कहना है कि इस जमीन का गांव के लोग लंबे समय से आवागमन के रास्ते के रूप में इस्तेमाल करते आ रहे हैं। ग्रामीणों का दावा है कि भूमि सरकारी बंजर श्रेणी की है और करीब एक सदी से लोग यहां से आवागमन करते रहे हैं। महिलाओं ने यह भी कहा कि लंबे समय से इस स्थान का उपयोग गोबर और कूड़ा डालने के लिए किया जाता रहा है।प्रदर्शनकारी महिलाओं ने आरोप लगाया कि अब विवादित भूमि को कब्रिस्तान के रूप में उपयोग किए जाने की कोशिश की जा रही है। उनका यह भी दावा है कि निजी जमीन के करीब एक से दो बीघा हिस्से को भी कब्रिस्तान के दायरे में शामिल दिखाने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि इन दावों की वास्तविक स्थिति राजस्व अभिलेखों और प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।ग्रामीणों का कहना है कि जमीन को लेकर मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में विचाराधीन है। उनके अनुसार, 16 दिसंबर 2025 को न्यायालय ने मामले में स्थगन आदेश दिया था। इसके बावजूद आरोप है कि जेसीबी मशीन के जरिये खेतों की मेड़ और रास्ते को नुकसान पहुंचाया गया। इससे ग्रामीणों के खेतों तक आने-जाने में परेशानी होने का दावा किया गया है।महिलाओं ने बताया कि रास्ता प्रभावित होने से ग्रामीणों के साथ उनके मवेशियों के लिए चारा लाने-ले जाने में भी दिक्कत हो रही है। इसी को लेकर उन्होंने प्रशासन से मौके का निरीक्षण कराने और राजस्व अभिलेखों के आधार पर भूमि की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।कलेक्ट्रेट पहुंची महिलाओं ने जिलाधिकारी कार्यालय में शिकायत दर्ज कराने का प्रयास किया। उनका कहना था कि मौके पर संबंधित अधिकारी उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें वापस लौटना पड़ा। महिलाओं ने मांग की कि राजस्व विभाग की टीम को मौके पर भेजकर जमीन की पैमाइश कराई जाए और यदि किसी प्रकार का अवैध कब्जा या रास्ता बाधित करने की पुष्टि होती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।ग्रामीणों ने कथित तौर पर जेसीबी चलाकर रास्ता प्रभावित करने वालों के खिलाफ कार्रवाई तथा आवागमन का रास्ता बहाल कराने की भी मांग की है। वहीं, जमीन के स्वामित्व, उपयोग और कथित कब्जे को लेकर दूसरे पक्ष का पक्ष समाचार में सामने नहीं आया है। ऐसे में विवादित भूमि की वास्तविक स्थिति राजस्व अभिलेखों और प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।