प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के शिक्षामित्रों को विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी)-2026 में शामिल होने की मांग को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली। न्यायालय ने इस संबंध में दाखिल याचिकाओं को खारिज कर दिया। इस फैसले से विशेष टीईटी में बैठने की अनुमति मांग रहे शिक्षामित्रों को झटका लगा है।मामले में वसीम अहमद सहित 220 याचिकाकर्ताओं ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। याचिकाकर्ताओं की मांग थी कि उन्हें भी विशेष टीईटी में शामिल होने का अवसर दिया जाए। उनका तर्क था कि जब पहले से कार्यरत शिक्षकों को इस परीक्षा में बैठने का मौका दिया जा रहा है, तो शिक्षामित्रों को भी इससे वंचित नहीं रखा जाना चाहिए।मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकल पीठ ने की। अदालत ने याचिकाकर्ताओं की दलीलों पर विचार करने के बाद उनकी मांग स्वीकार नहीं की। अदालत के फैसले का मुख्य आधार यह रहा कि सामान्य शिक्षक पात्रता परीक्षा में शामिल होने की पात्रता मात्र से किसी अभ्यर्थी को विशेष टीईटी में बैठने का अधिकार नहीं मिल जाता। दोनों श्रेणियों की पात्रता और कानूनी स्थिति अलग-अलग हो सकती है।विशेष टीईटी निर्धारित शर्तों के तहत संबंधित शिक्षकों को पात्रता हासिल करने का अवसर देने के लिए आयोजित की जा रही है। ऐसे में परीक्षा में शामिल होने के लिए संबंधित नियमों और निर्धारित पात्रता मानकों को पूरा करना आवश्यक है।इस फैसले के बाद विशेष टीईटी में शामिल होने की मांग कर रहे शिक्षामित्रों के सामने आगे की कानूनी राह तलाशने का विकल्प रह गया है। हालांकि, इस आदेश को शिक्षामित्रों की नौकरी समाप्त करने का फैसला नहीं माना जा सकता। अदालत में सुनवाई का विषय विशेष टीईटी में शामिल होने की अनुमति से संबंधित था।