मुजफ्फरनगर। जिले के प्रमुख धार्मिक स्थल शुकतीर्थ के विकास और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में प्रदेश सरकार ने एक और कदम बढ़ाया है। राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार कपिल देव अग्रवाल के प्रयासों से शुकतीर्थ के विकास के लिए 15 करोड़ रुपये की नई धनराशि स्वीकृत की गई है। इससे पहले भी यहां विकास कार्यों के लिए पांच करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे। वहीं, कल्लरपुर कचौली स्थित मंदिर के विकास के लिए 1.25 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिल चुकी है। इन तीनों स्वीकृतियों को मिलाकर कुल राशि 21.25 करोड़ रुपये होती है।शुकतीर्थ मुजफ्फरनगर की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां दूर-दराज के क्षेत्रों से श्रद्धालु दर्शन और धार्मिक आयोजनों में शामिल होने पहुंचते हैं। ऐसे में विकास योजनाओं के माध्यम से तीर्थस्थल पर सुविधाओं का विस्तार करने और इसकी धार्मिक महत्ता को और मजबूत बनाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि शुकतीर्थ लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। प्रदेश सरकार धार्मिक स्थलों की गरिमा बनाए रखने के साथ वहां आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्वीकृत धनराशि से होने वाले विकास कार्यों की योजना जल्द तैयार की जाए और सभी कार्य निर्धारित समयसीमा में गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरे कराए जाएं।उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में लापरवाही नहीं होनी चाहिए। प्रत्येक परियोजना की नियमित निगरानी की जाए, ताकि सरकारी धन का सही उपयोग हो और श्रद्धालुओं को योजनाओं का वास्तविक लाभ मिल सके। तीर्थस्थल पर सुविधाओं का विस्तार होने से यहां आने वाले लोगों को सहूलियत मिलने के साथ धार्मिक पर्यटन को भी प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए कार्य कर रही है। शुकतीर्थ जैसे महत्वपूर्ण स्थलों का विकास क्षेत्र की पहचान को मजबूत करने के साथ स्थानीय गतिविधियों को भी बढ़ावा दे सकता है।उन्होंने कहा कि शुकतीर्थ का विकास केवल निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र की आस्था, संस्कृति और गौरव से जुड़ा विषय है। सरकार का उद्देश्य तीर्थस्थल पर बेहतर व्यवस्थाएं विकसित करना और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक वातावरण तैयार करना है।