मुजफ्फरनगर। युवाओं को समाज के प्रति जिम्मेदार बनाने और उनकी प्रतिभा को सकारात्मक दिशा देने के उद्देश्य से शनिवार को माय भारत कार्यशाला का आयोजन किया गया। युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार की पहल के तहत आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों को राष्ट्र निर्माण, सामाजिक सेवा, नेतृत्व क्षमता और व्यक्तित्व विकास के महत्व से अवगत कराया गया। वक्ताओं ने युवाओं से अपनी ऊर्जा का उपयोग समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए करने का आह्वान किया।कार्यशाला में श्रीराम कॉलेज ऑफ फार्मेसी के निदेशक डॉ. गिरेंद्र कुमार गौतम मुख्य अतिथि रहे, जबकि डॉ. प्रेरणा मित्तल विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। वक्ताओं ने कहा कि युवाओं की भागीदारी के बिना देश के विकास की कल्पना अधूरी है। विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए, जिससे उनमें नेतृत्व क्षमता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित हो सके।मुख्य अतिथि डॉ. गिरेंद्र कुमार गौतम ने माय भारत पोर्टल की उपयोगिता बताते हुए कहा कि यह मंच युवाओं को स्वयंसेवा, सामाजिक कार्यों और नेतृत्व विकास से जुड़ने के अवसर उपलब्ध कराता है। उन्होंने विद्यार्थियों से पोर्टल पर उपलब्ध गतिविधियों में भाग लेकर अपनी क्षमताओं को निखारने और समाज के प्रति अपने दायित्वों को समझने की अपील की।कार्यशाला में मात्र शक्ति सेवा समिति की राष्ट्रीय अध्यक्ष पूजा द्विवेदी ने स्वस्थ जीवनशैली अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और पर्याप्त नींद के महत्व के बारे में बताया। इस दौरान अंश वत्स ने चेयर योग के सरल अभ्यास कराए। उन्होंने बताया कि कक्षा में बैठे-बैठे किए जाने वाले ये अभ्यास शरीर को सक्रिय रखने और तनाव कम करने में सहायक हो सकते हैं।शब्द संसार साहित्य मंच की संस्थापक अध्यक्ष डॉ. श्वेता वर्मा ने युवाओं को देश की प्रगति की आधारशिला बताते हुए कहा कि उचित मार्गदर्शन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और कौशल विकास से युवा अपनी क्षमता का बेहतर उपयोग कर सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने और समाज के हित में कार्य करने के लिए प्रेरित किया।स्टार यूथ क्लब के अध्यक्ष अनुराग शर्मा ने पावरपॉइंट प्रस्तुति के माध्यम से नशामुक्त समाज की आवश्यकता पर विचार रखे। जिला युवा अधिकारी अविक्षा कपूर ने नशे के दुष्प्रभावों की जानकारी देते हुए विद्यार्थियों को इससे दूर रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि युवावस्था में लिए गए फैसले जीवन की दिशा तय करते हैं। इसलिए युवाओं को पढ़ाई, खेलकूद और रचनात्मक गतिविधियों पर ध्यान देना चाहिए तथा अपने साथियों को भी नशे के प्रति जागरूक करना चाहिए।कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों को नशामुक्त भारत अभियान से जोड़ने के उद्देश्य से सशक्तिकरण पत्र भी प्रदान किए गए। इसके माध्यम से उन्हें अपने सहपाठियों और आसपास के लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। कार्यक्रम में युवाओं को सामाजिक सेवा, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और सामुदायिक गतिविधियों में भागीदारी बढ़ाने का संदेश दिया गया।