राजपाल सैनी, शिवान सैनी, हरवीर मलिक, कमल गौतम, दारा सिंह और मोहन प्रजापति सपा में शामिल, 2027 के चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज

मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में नए घटनाक्रम सामने आ रहे हैं। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की मौजूदगी में अलग-अलग दलों से जुड़े कई नेताओं ने सपा का दामन थामा है। इनमें पूर्व सांसद राजपाल सैनी, उनके पुत्र शिवान सैनी, शामली के हरवीर मलिक, कमल गौतम तथा प्रजापति समाज से जुड़े दारा सिंह प्रजापति और मोहन प्रजापति के नाम शामिल हैं। इन नेताओं के सपा से जुड़ने के घटनाक्रम ने मुजफ्फरनगर, शामली और आसपास के जिलों में राजनीतिक चर्चाओं को तेज कर दिया है।

राजपाल सैनी की सपा में वापसी, शिवान सैनी भी जुड़े

मुजफ्फरनगर की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे पूर्व सांसद एवं पूर्व मंत्री राजपाल सैनी ने भाजपा छोड़कर समाजवादी पार्टी में वापसी की है। लखनऊ में अखिलेश यादव ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई। इस दौरान उनके पुत्र शिवान सैनी और समर्थक भी सपा से जुड़े।

राजपाल सैनी बसपा के टिकट पर विधायक चुने गए थे और राज्यसभा सदस्य भी रह चुके हैं। उन्होंने अलग-अलग समय पर बसपा, सपा, रालोद और भाजपा में राजनीतिक भूमिका निभाई है। अब उनकी सपा में वापसी को आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है।

राजपाल सैनी के पुत्र शिवान सैनी की राजनीतिक भूमिका को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में वह बसपा के टिकट पर खतौली सीट से चुनाव लड़ चुके हैं। अब 2027 के चुनाव में मीरापुर विधानसभा सीट को लेकर उनके नाम की चर्चा है। हालांकि, सपा की ओर से किसी सीट पर उनकी उम्मीदवारी की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

तीन दशक तक भाजपा में रहे हरवीर मलिक ने भी छोड़ा साथ

शामली के वरिष्ठ नेता हरवीर मलिक का भाजपा छोड़कर सपा में शामिल होना भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है। वह लंबे समय तक भाजपा में सक्रिय रहे और पार्टी की प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य भी रहे। 16 अक्टूबर को उन्होंने अखिलेश यादव की मौजूदगी में समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण की।

कमल गौतम ने भी थामा सपा का दामन

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आजाद समाज पार्टी से जुड़े रहे कमल गौतम ने भी समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण की है। वह क्षेत्र में पार्टी के प्रभारी के रूप में काम कर चुके हैं। उनके सपा में शामिल होने से क्षेत्र में दलित समाज से जुड़े राजनीतिक समीकरणों को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।
कमल गौतम के अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अन्य दलों से जुड़े नेताओं ने भी सपा की सदस्यता ली है। इससे क्षेत्र में पार्टी के संगठन विस्तार और आगामी चुनाव की तैयारियों को लेकर गतिविधियां तेज होती दिखाई दे रही हैं।

दारा सिंह प्रजापति और मोहन प्रजापति के जुड़ने से प्रजापति समाज की भागीदारी चर्चा में

प्रजापति समाज से जुड़े नेताओं दारा सिंह प्रजापति और मोहन प्रजापति की अखिलेश यादव से मुलाकात भी राजनीतिक घटनाक्रम का प्रमुख हिस्सा बनी हुई है। दारा सिंह प्रजापति राष्ट्रीय प्रजापति महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं। वहीं, मोहन प्रजापति अति पिछड़ा वर्ग मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।
दोनों नेताओं की राजनीतिक गतिविधियों के बीच प्रजापति समाज और अति पिछड़े वर्गों की भागीदारी का मुद्दा सामने आया है। मोहन प्रजापति ने अखिलेश यादव से मुलाकात के दौरान आगामी विधानसभा चुनाव में अति पिछड़े और दलित समाज को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने की मांग उठाई थी। उन्होंने इन वर्गों के लिए करीब 300 टिकट दिए जाने की मांग रखी थी। साथ ही अति पिछड़े समाज से जुड़े उत्पीड़न के मामलों को प्रमुखता से उठाने की अपील भी की थी।
दारा सिंह प्रजापति की राजनीतिक गतिविधियों को भी प्रजापति समाज की भागीदारी के संदर्भ में देखा जा रहा है। उनके सपा से जुड़ने की खबरों के बीच समर्थकों की भूमिका और आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों पर नजर रहेगी।

2027 के चुनाव से पहले पश्चिम यूपी में बढ़ीं गतिविधियां

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अलग-अलग राजनीतिक दलों से नेताओं के सपा में शामिल होने के घटनाक्रम के बीच आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। मुजफ्फरनगर और शामली के नेताओं के साथ सामाजिक संगठनों से जुड़े चेहरों की सक्रियता ने क्षेत्रीय राजनीति को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
राजपाल सैनी और शिवान सैनी की सपा में वापसी, हरवीर मलिक और कमल गौतम का पार्टी से जुड़ना तथा प्रजापति समाज के नेताओं की गतिविधियां आगामी चुनाव से पहले महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम हैं। हालांकि, इन नेताओं को पार्टी में कौन-सी जिम्मेदारी मिलेगी और विधानसभा चुनाव में किसे किस सीट से उतारा जाएगा, इस बारे में अभी अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है।
फिलहाल पश्चिमी उत्तर प्रदेश में नेताओं के दल बदलने और नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं जारी हैं। आगामी दिनों में पार्टी की ओर से होने वाली घोषणाओं से इन घटनाक्रमों की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

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