मुजफ्फरनगर। छोटे बच्चों में डायरिया के कारण होने वाली मौतों की रोकथाम और दस्त प्रबंधन को बेहतर बनाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे ‘डायरिया से डर नहीं’ कार्यक्रम को मुजफ्फरनगर केमिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन का सहयोग मिला है। कार्यक्रम के तहत स्थानीय होटल में दवा व्यापारियों के लिए अभिमुखीकरण कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें डायरिया की रोकथाम, स्वच्छता, स्तनपान तथा जिंक और ओआरएस के उपयोग के महत्व पर विस्तार से चर्चा की गई।कार्यशाला का आयोजन पापुलेशन सर्विसेज इंटरनेशनल इंडिया (पीएसआई इंडिया) और केनव्यू के सहयोग से किया गया। मुजफ्फरनगर केमिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन के संरक्षक योगेश मदन ने कार्यशाला की अध्यक्षता की। इस दौरान दवा व्यापारियों ने बच्चों को डायरिया से होने वाली गंभीर स्थिति से बचाने के लिए जागरूकता बढ़ाने और आवश्यक स्तर पर सहयोग करने की बात कही।कार्यक्रम के दौरान पीएसआई इंडिया की प्रतिनिधि कोमल घई और भारती ने संस्था की गतिविधियों तथा ‘डायरिया से डर नहीं’ कार्यक्रम के उद्देश्य की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम उत्तर प्रदेश के 13 और बिहार के तीन जनपदों में संचालित किया जा रहा है। इसका प्रमुख उद्देश्य शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों में डायरिया के कारण होने वाली मृत्यु को शून्य करना तथा दस्त से पीड़ित बच्चों के उचित प्रबंधन को बढ़ावा देना है।कार्यशाला में इस बात पर जोर दिया गया कि डायरिया की रोकथाम के लिए केवल उपचार पर निर्भर रहने के बजाय स्वच्छता और बचाव के उपायों को भी व्यापक स्तर पर अपनाया जाना जरूरी है। परिवारों में साफ-सफाई के प्रति जागरूकता, सही तरीके से हाथ धोने की आदत और छोटे बच्चों को स्तनपान कराने जैसे उपाय डायरिया से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।केमिस्ट एसोसिएशन के महामंत्री अक्षय मित्तल ने कार्यशाला में शामिल प्रतिभागियों का स्वागत किया और कार्यक्रम के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने दवा व्यापारियों की भूमिका को भी रेखांकित किया। दवा विक्रेताओं के माध्यम से लोगों तक स्वास्थ्य संबंधी सही जानकारी पहुंचाने और डायरिया की स्थिति में उचित सलाह के महत्व पर चर्चा हुई।एसोसिएशन के संरक्षक योगेश मदन ने डायरिया की रोकथाम में आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखने, हाथों की सफाई पर विशेष ध्यान देने तथा बच्चों को स्तनपान कराने की आवश्यकता बताई। उन्होंने स्वच्छता से जुड़े उपायों को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने पर जोर दिया।एसोसिएशन के अध्यक्ष कमलजीत सिंह ने डायरिया के प्रबंधन में जिंक और ओआरएस की उपयोगिता के बारे में जानकारी दी। कार्यशाला में बताया गया कि डायरिया के दौरान बच्चों की स्थिति पर ध्यान देना और दस्त प्रबंधन से संबंधित सही जानकारी लोगों तक पहुंचाना आवश्यक है।कार्यक्रम में केमिस्ट एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष राजेश जुनेजा, विजेंद्र शर्मा, आशीष अग्रवाल, वरुण चौधरी, हर्ष भाटिया और रवि कौशिक सहित एसोसिएशन के अन्य सदस्य मौजूद रहे। पीएसआई इंडिया के प्रतिनिधियों ने भी कार्यशाला में सहभागिता की।कार्यशाला का उद्देश्य दवा व्यापारियों को डायरिया से जुड़े आवश्यक स्वास्थ्य उपायों की जानकारी देकर उन्हें जागरूकता के प्रयासों से जोड़ना रहा। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि बच्चों में डायरिया की रोकथाम के लिए स्वच्छता, सही देखभाल और समय पर उचित दस्त प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाना जरूरी है।