नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र में मंगलवार को ‘चढ़ावा चोरी’ के आरोप और झारखंड में छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का मुद्दा प्रमुखता से उठा। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के सांसदों ने दोनों मामलों में सरकार से जवाब की मांग की। विपक्षी सांसदों ने आरोपों की जांच और संबंधित घटनाओं पर सदन में विस्तृत चर्चा की मांग रखी।समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने दोनों मामलों को एक-दूसरे से जुड़ा बताते हुए कहा कि परीक्षा और राम मंदिर से संबंधित विषयों को अलग-अलग नजरिये से नहीं देखा जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग बिना पंजीकरण के गतिविधियां संचालित कर रहे हैं और युवाओं से जुड़ी सूचनाएं जुटाने का प्रयास किया जा रहा है।अखिलेश यादव ने कथित फोन कॉल और युवाओं से संबंधित आंकड़े एकत्र किए जाने के मामले पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि बड़ी संख्या में फोन किए गए थे तो संबंधित एजेंसियों और सरकार को इसकी जानकारी होनी चाहिए थी। उन्होंने इन मामलों पर संसद में चर्चा की आवश्यकता बताई।सपा सांसद डिंपल यादव ने भी दोनों विषयों को सदन में उठाया। उन्होंने ‘चढ़ावा चोरी’ के आरोपों को लोगों की धार्मिक आस्था से जुड़ा विषय बताते हुए चर्चा की मांग की। झारखंड में छात्रों के साथ हुई कार्रवाई का उल्लेख करते हुए उन्होंने दावा किया कि सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी में करीब दस बच्चों के पैलेट गन से घायल होने की बात सामने आई है। उन्होंने सरकार के उस पक्ष पर सवाल उठाया, जिसमें पैलेट गन के इस्तेमाल से इनकार किया गया था।सपा सांसद राम गोपाल यादव ने भी ‘चढ़ावा चोरी’ के आरोपों को गंभीर बताते हुए कथित तौर पर विदेश से भेजी गई रकम और सोने-चांदी के हिसाब का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि मामले में धन और कीमती वस्तुओं के स्रोत तथा उनके उपयोग का स्पष्ट विवरण सामने आना चाहिए।इधर, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और गौरव गोगोई ने संसद परिसर में भाजपा सांसदों के प्रदर्शन पर सवाल उठाए। प्रियंका गांधी ने कहा कि सत्तारूढ़ दल के सांसदों को प्रदर्शन करते देखना असामान्य है और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को सदन में आकर विपक्ष के सवालों का जवाब देना चाहिए।गौरव गोगोई ने कहा कि शिक्षा से जुड़े विषयों पर संसद में चर्चा हो चुकी है, लेकिन गृह मंत्री की मौजूदगी और जवाब को लेकर विपक्ष लगातार मांग कर रहा है। उन्होंने झारखंड में छात्रों पर पैलेट गन के कथित इस्तेमाल पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि कार्रवाई का निर्देश किस स्तर से दिया गया था। विपक्ष ने पूरे मामले में सरकार से स्पष्ट जवाब देने की मांग की।

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