नई दिल्ली। स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प दोहराते हुए युवाओं, आत्मनिर्भरता, ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा, कृषि, तकनीक और महिला भागीदारी को विकास की प्राथमिकताओं में शामिल किया। उन्होंने अगले एक वर्ष में एक करोड़ युवाओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता का प्रशिक्षण देने तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग का नेटवर्क विकसित करने की घोषणा की।प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को अब छोटे लक्ष्यों तक सीमित नहीं रहना है। देश को ऐसी दिशा में आगे बढ़ना होगा, जहां उसकी आर्थिक, सामरिक और तकनीकी क्षमता दुनिया में नई पहचान बनाए। उन्होंने 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को सामने रखते हुए विकास की सात प्रमुख शक्तियों पर विशेष ध्यान देने की बात कही।प्रधानमंत्री के अनुसार इन सात शक्तियों में विनिर्माण, कृषि एवं खाद्य उत्पादन, तकनीक एवं नवाचार, तेज और आधुनिक परिवहन व्यवस्था, रक्षा क्षमता, हरित एवं समुद्री अर्थव्यवस्था तथा भारत की सांस्कृतिक और रचनात्मक शक्ति शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में मजबूत आधार तैयार कर भारत वैश्विक स्तर पर अपनी भूमिका और प्रभाव बढ़ा सकता है।युवाओं के लिए प्रधानमंत्री की घोषणाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का प्रशिक्षण प्रमुख रहा। उन्होंने अगले एक वर्ष में एक करोड़ युवाओं को इस क्षेत्र में प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा। उनका कहना था कि आने वाले समय में तकनीकी दक्षता रोजगार और नवाचार की दिशा तय करेगी, इसलिए युवाओं को नई तकनीकों के अनुरूप तैयार करना जरूरी है।प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए भी प्रधानमंत्री ने महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने महंगी कोचिंग से आर्थिक रूप से प्रभावित होने वाले गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के विद्यार्थियों को राहत देने के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग का नेटवर्क तैयार करने की बात कही। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को घर के आसपास रहकर गुणवत्तापूर्ण तैयारी का अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत पर जोर देते हुए कहा कि देश को महत्वपूर्ण क्षेत्रों में दूसरे देशों पर निर्भरता कम करनी होगी। उन्होंने देश में सेमीकंडक्टर निर्माण को बढ़ाने की आवश्यकता बताई और तीन संयंत्र शुरू होने का उल्लेख करते हुए आने वाले वर्षों में कई और संयंत्र स्थापित करने का लक्ष्य सामने रखा।ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भी प्रधानमंत्री ने बड़ा लक्ष्य रखा। उन्होंने 2047 तक परमाणु ऊर्जा की क्षमता को 100 गीगावाट तक पहुंचाने की बात कही। इसी दशक में पांच नए परमाणु रिएक्टर शुरू करने का लक्ष्य भी बताया गया। समुद्र में तेल और गैस की खोज को बढ़ावा देने तथा महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए किए जा रहे प्रयासों का भी उन्होंने उल्लेख किया।रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को भविष्य की सुरक्षा के लिए जरूरी बताते हुए प्रधानमंत्री ने आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति का जिक्र किया। उन्होंने ड्रोन, ड्रोन रोधी व्यवस्था और अतिध्वनिक रक्षा तकनीक सहित आधुनिक सुरक्षा क्षमताओं में भारत को मजबूत बनाने पर जोर दिया। उन्होंने ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ पर तेजी से काम होने की भी जानकारी दी।प्रधानमंत्री ने नागरिक सुरक्षा को भी राष्ट्रीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों और बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए व्यापक तैयारी आवश्यक है। इसी क्रम में नागरिक सुरक्षा के लिए बड़े स्वयंसेवी नेटवर्क को मजबूत करने की बात कही।महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की अपील करते हुए प्रधानमंत्री ने राजनीतिक दलों से लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देने की दिशा में आगे बढ़ने का आग्रह किया। उन्होंने महिला स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की बढ़ती भूमिका का उल्लेख करते हुए ‘लखपति दीदी’ अभियान की प्रगति भी बताई।खेल क्षेत्र में प्रधानमंत्री ने 2036 के ओलंपिक की मेजबानी के लिए भारत की तैयारी का उल्लेख किया। उन्होंने बच्चों में खेल प्रतिभा तलाशने और उन्हें शुरुआती स्तर से प्रशिक्षण देने पर जोर दिया। साथ ही युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए देशव्यापी नशामुक्ति अभियान में परिवारों और सामाजिक संगठनों की भागीदारी का आह्वान किया।प्रधानमंत्री ने नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों की कार्रवाई का उल्लेख करते हुए कहा कि सशस्त्र नक्सली हिंसा अब अंतिम दौर में है। उन्होंने वैचारिक स्तर पर हिंसा को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों के प्रति भी सतर्क रहने की आवश्यकता जताई।प्रधानमंत्री ने आगामी जनगणना में नागरिकों से सक्रिय सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि सही आंकड़े देश की विकास योजनाओं और नीतियों को प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने युवाओं से अपने परिवार की जानकारी सही तरीके से दर्ज कराने में सहयोग करने का आग्रह किया।अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने और विकसित भारत के लक्ष्य को सामूहिक संकल्प के साथ पूरा करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत के पास अवसर भी है और सामर्थ्य भी, जरूरत इसे सही दिशा में इस्तेमाल करने की है। उनके संबोधन में युवाओं को नई तकनीक से जोड़ने, देश को आत्मनिर्भर बनाने, ऊर्जा और रक्षा क्षमता मजबूत करने तथा 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने पर विशेष जोर रहा।