मेरठ। उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) ने जैश-ए-मोहम्मद की कथित विचारधारा से प्रभावित एक युवक को गिरफ्तार किया है। एटीएस के अनुसार पकड़े गए युवक की पहचान मोहम्मद जफर के रूप में हुई है। करीब 24 वर्षीय जफर मूल रूप से बिहार के पूर्णिया का रहने वाला बताया गया है। जांच एजेंसी का दावा है कि वह वर्ष 2016 से 2023 के बीच मेरठ में रहकर एक मदरसे में पढ़ाई करता था और इसी दौरान कथित तौर पर आतंकी संगठन की विचारधारा से प्रभावित हुआ।एटीएस के मुताबिक जफर ने पूछताछ में बताया कि पढ़ाई के दौरान उसने जैश-ए-मोहम्मद से संबंधित सामग्री पढ़ी थी। जांच एजेंसी का दावा है कि इसके बाद वह संगठन की विचारधारा से प्रभावित होने लगा। एजेंसी के अनुसार जफर ने जैश-ए-मोहम्मद और उसके प्रमुख मसूद अजहर से संबंधित सामग्री देखी तथा उसके भाषणों और विचारों से भी प्रभावित हुआ।जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर एटीएस का कहना है कि जफर के भीतर धीरे-धीरे खुद को मुजाहिद बनाने की सोच विकसित होने लगी थी। एजेंसी के अनुसार उसके कथित गतिविधियों का दायरा केवल धार्मिक या वैचारिक सामग्री पढ़ने तक सीमित नहीं था, बल्कि वह सामाजिक माध्यमों और अन्य डिजिटल माध्यमों पर भी कथित तौर पर जिहादी विचारधारा से जुड़ी सामग्री तलाशता और देखता था।एटीएस अब आरोपी की डिजिटल गतिविधियों की भी गहनता से जांच कर रही है। जांच एजेंसी उसके मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों से मिली सामग्री के आधार पर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि वह किन लोगों के संपर्क में था और उसकी गतिविधियों का दायरा कितना था। इसके साथ ही सामाजिक माध्यमों पर उसकी गतिविधियों और कथित तौर पर देखी या खोजी गई सामग्री की भी पड़ताल की जा रही है।जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपी के कथित आर्थिक लेन-देन को भी जांच के दायरे में लिया गया है। एटीएस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि उसके बैंक खातों या अन्य माध्यमों से किसी प्रकार की संदिग्ध धनराशि का लेन-देन तो नहीं हुआ। कथित आर्थिक सहायता या धन पहुंचाने वाले किसी तंत्र की भूमिका रही है या नहीं, इसकी भी जांच की जा रही है।एटीएस यह भी जानकारी जुटा रही है कि जफर के संपर्क में कौन-कौन लोग थे। जांच एजेंसी उसके संपर्कों और बातचीत से संबंधित उपलब्ध जानकारी का परीक्षण कर रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि उसकी कथित गतिविधियां किसी अन्य व्यक्ति या समूह से जुड़ी थीं या नहीं। साथ ही यह जानने का प्रयास किया जा रहा है कि उसे कथित तौर पर आपत्तिजनक या जिहादी सामग्री किस माध्यम से प्राप्त हुई।पूछताछ में जफर ने कथित तौर पर बताया कि उसने पढ़ाई के दौरान जैश-ए-मोहम्मद के बारे में सामग्री पढ़ी थी। एटीएस के अनुसार, जिहाद और मुजाहिदों की कथित शहादत से जुड़ी सामग्री से प्रभावित होने के बाद उसके विचारों में बदलाव आया। इसके बाद वह मसूद अजहर के भाषणों और विचारधारा से प्रभावित होकर खुद को मुजाहिद बनाने के बारे में सोचने लगा।एटीएस का कहना है कि मेरठ के मदरसे में पढ़ाई के दौरान ही जफर पर कथित तौर पर इस विचारधारा का प्रभाव बढ़ता गया। धीरे-धीरे उसने जैश-ए-मोहम्मद और मसूद अजहर से जुड़ी सामग्री देखना शुरू किया। जांच एजेंसी अब इस पूरे घटनाक्रम को डिजिटल साक्ष्यों, संपर्कों और अन्य उपलब्ध तथ्यों से जोड़कर आगे की पड़ताल कर रही है।फिलहाल एटीएस की ओर से आरोपी से पूछताछ जारी है। जांच एजेंसी का ध्यान उसके डिजिटल उपकरणों, सामाजिक माध्यमों की गतिविधियों, संपर्कों तथा कथित आर्थिक लेन-देन पर है। इन माध्यमों से यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि आरोपी की गतिविधियां केवल वैचारिक सामग्री तक सीमित थीं अथवा उसके संपर्क किसी संगठित नेटवर्क तक भी पहुंचे थे।एटीएस के अनुसार, जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।

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