मेरठ। किसान नेता दिग्विजय भाटी ने तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अविनाश पांडेय और पुलिसकर्मियों पर गंभीर मारपीट के आरोप लगाए हैं। घटना को लेकर उनका वीडियो सामने आने के बाद मामला फिर सुर्खियों में आ गया है। आरोपों को लेकर अपर पुलिस महानिदेशक मेरठ जोन ने जांच सहारनपुर के पुलिस उपमहानिरीक्षक अभिषेक सिंह को सौंप दी है।दिग्विजय भाटी का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी के संबंध में बातचीत के लिए वह वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे थे। उनका दावा है कि वहां उनके साथ पहले अभद्रता की गई और बाद में उन्हें दूसरे कमरे में ले जाकर कथित रूप से पीटा गया। भाटी के मुताबिक मारपीट इतनी ज्यादा की गई कि वह कुछ समय के लिए बेहोश हो गए। उन्होंने पुलिस अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।शुक्रवार को समाजवादी पार्टी के विधायक अतुल प्रधान ने अपने आवास पर पत्रकार वार्ता की। इस दौरान दिग्विजय भाटी भी मौजूद रहे। उनकी आंख पर पट्टी बंधी थी। उन्होंने पत्रकारों के सामने कथित मारपीट की घटना बताते हुए पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए।मामले में दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव की ओर से पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उनका यह भी दावा है कि उनके खिलाफ फर्जी कार्रवाई या मुठभेड़ की साजिश की जा रही थी। हालांकि इन आरोपों की अभी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।विधायक अतुल प्रधान ने भी पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए घटना से संबंधित सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। दूसरी ओर, तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडेय ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज किया है।यह विवाद मेरठ में ललिता गौतम हत्याकांड के बाद हुए प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई से जुड़ा है। ललिता गौतम का शव रोहटा थाना क्षेत्र के उकसिया गांव में गन्ने के खेत से मिला था। मामले को लेकर परिजनों और समर्थकों ने प्रदर्शन किया था। इसके बाद पुलिस कार्रवाई को लेकर भी विवाद सामने आया था।अब मारपीट के आरोपों के बाद मामले की जांच सहारनपुर के पुलिस उपमहानिरीक्षक अभिषेक सिंह को सौंपी गई है। जांच में घटना से जुड़े साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज, चिकित्सकीय अभिलेखों और संबंधित लोगों के बयानों की पड़ताल की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों की वास्तविकता और जिम्मेदारी की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।