मेरठ। भाजपा को मेरठ में उस समय झटका लगा, जब ब्लॉक प्रमुख कपिल मुखिया ने पार्टी से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी। इस्तीफे में उन्होंने प्रदेश सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में किसानों, युवाओं, व्यापारियों और समाज के विभिन्न वर्गों की समस्याओं पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है।कपिल मुखिया ने अपने इस्तीफे में कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक जैसी घटनाएं युवाओं के भविष्य के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। मेहनत करने वाले विद्यार्थियों को इसका नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए युवाओं के हित में प्रभावी कदम उठाने की जरूरत बताई।किसानों से जुड़े मुद्दों को भी उन्होंने प्रमुखता से उठाया। उनका आरोप है कि जमीन अधिग्रहण के दौरान किसानों को उनकी जमीन का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने सर्किल रेट बढ़ाने की मांग के साथ फसलों के उचित दाम और खाद समेत कृषि संबंधी सामान की कीमतों का मुद्दा भी उठाया।मेरठ के सेंट्रल मार्केट में हुई कार्रवाई को लेकर भी कपिल मुखिया ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई से व्यापारियों और स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। निजी अस्पतालों से संबंधित व्यवस्था को लेकर भी उन्होंने सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए।इस्तीफे में उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं की उपेक्षा का आरोप भी लगाया। उनका कहना है कि लंबे समय से संगठन के लिए मेहनत करने वाले कार्यकर्ताओं को वह सम्मान और महत्व नहीं मिल रहा, जिसके वे हकदार हैं। इसके साथ ही उन्होंने प्रशासन पर आम लोगों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया।कपिल मुखिया ने कहा कि इन परिस्थितियों से आहत होकर उन्होंने भाजपा से अलग होने का निर्णय लिया है। उनके इस्तीफे के बाद मेरठ की स्थानीय राजनीति में चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, उनके आगे के राजनीतिक कदम को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। सरकार और भाजपा संगठन की ओर से उनके आरोपों पर प्रतिक्रिया का इंतजार है।