मुजफ्फरनगर। मोरना सहकारी चीनी मिल के विस्तारीकरण की प्रक्रिया एक बार फिर अटक गई है। परियोजना के लिए शुक्रवार को लखनऊ में हुई टेंडर प्रक्रिया में पर्याप्त कंपनियों के शामिल नहीं होने के कारण टेंडर निरस्त कर दिया गया। अब विभाग की ओर से 14 सितंबर को जेम पोर्टल के माध्यम से पांचवीं बार टेंडर प्रक्रिया कराने की तैयारी है।मोरना चीनी मिल के विस्तारीकरण को लेकर क्षेत्र के गन्ना किसानों को लंबे समय से उम्मीद है। मिल की पेराई क्षमता बढ़ने से क्षेत्र के किसानों को गन्ना आपूर्ति में राहत मिलने की संभावना है। इसके बावजूद टेंडर प्रक्रिया बार-बार आगे नहीं बढ़ पा रही है।बताया गया कि टेंडर प्रक्रिया में नियम के अनुसार कम से कम चार कंपनियों का भाग लेना जरूरी है। इस बार केवल दो कंपनियों ने ही टेंडर में रुचि दिखाई। निर्धारित संख्या पूरी नहीं होने के कारण प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया जा सका और चौथी बार टेंडर निरस्त करना पड़ा। मिल प्रबंधक बीपी पांडेय ने अगली प्रक्रिया में टेंडर सफल होने की उम्मीद जताई है।विस्तारीकरण के तहत मिल में प्रतिदिन 35 हजार क्विंटल गन्ने की पेराई क्षमता वाली नई यूनिट स्थापित करने की योजना है। इससे मिल की क्षमता में बड़ा इजाफा होगा और आसपास के किसानों को अपनी उपज की आपूर्ति में सुविधा मिलने की उम्मीद है।इधर, बिजनौर के रालोद सांसद चंदन चौहान ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर मोरना चीनी मिल के विस्तारीकरण को लेकर चर्चा की। सांसद ने परियोजना की स्थिति से मुख्यमंत्री को अवगत कराया। उन्होंने बताया कि 14 सितंबर को टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण कार्य को गति देने का प्रयास किया जाएगा। परियोजना को दो पेराई सत्रों में पूरा करने का लक्ष्य भी बताया गया है।बार-बार टेंडर निरस्त होने से किसानों में नाराजगीटेंडर प्रक्रिया लगातार निरस्त होने से मोरना और आसपास के गन्ना किसानों में नाराजगी बढ़ रही है। किसानों का कहना है कि विस्तारीकरण की घोषणा के बाद उन्हें उम्मीद थी कि मिल की क्षमता जल्द बढ़ेगी, लेकिन टेंडर प्रक्रिया के बार-बार अटकने से परियोजना में देरी हो रही है।यूसुफपुर के किसान टीनू चौधरी, बेहड़ा सादात के प्रधान बबलू चौधरी, भोकरहेड़ी के प्रदीप सहरावत और अथाई के किसान श्यामवीर सिंह समेत अन्य किसानों ने सरकार से टेंडर प्रक्रिया जल्द पूरी कराने की मांग की है। किसानों ने कहा कि 14 सितंबर की प्रक्रिया भी सफल नहीं हुई तो आंदोलन का रास्ता अपनाने पर विचार किया जाएगा।अब किसानों और मिल क्षेत्र के लोगों की निगाहें 14 सितंबर को होने वाली पांचवीं टेंडर प्रक्रिया पर टिकी हैं। इसके सफल होने पर ही लंबे समय से प्रतीक्षित मोरना चीनी मिल विस्तारीकरण परियोजना के धरातल पर उतरने का रास्ता साफ हो सकेगा।