प्रदेश सरकार ने विकास प्राधिकरणों और आवास विकास परिषद की संपत्तियों के ऑनलाइन पंजीकरण संबंधी नई व्यवस्था फिलहाल वापस ले ली है। अधिवक्ताओं और विलेख लेखकों के विरोध के बाद शासन ने 4 जून को जारी आदेश निरस्त कर दिया।स्टांप एवं पंजीयन राज्य मंत्री रवींद्र जायसवाल ने बताया कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद कई तरह की आपत्तियां सामने आई थीं। इसे देखते हुए शासन ने तत्काल प्रभाव से आदेश वापस लेने का निर्णय किया है।सरकार ने जून में जारी आदेश के जरिए संपत्तियों के प्रथम पंजीकरण की प्रक्रिया को आसान बनाने की पहल की थी। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत क्रेता, अधिवक्ता, विलेख लेखक और संबंधित अधिकारी की उप निबंधक कार्यालय में अनिवार्य उपस्थिति समाप्त की जानी थी। दस्तावेज सीधे संबंधित कार्यालय से भेजे जाने थे, जिससे प्रक्रिया तेज हो सके।नई व्यवस्था के विरोध में अधिवक्ताओं और विलेख लेखकों ने आंदोलन शुरू कर दिया था। उनका कहना था कि इससे उनके कामकाज और रोजगार पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। विरोध बढ़ने पर शासन को पुनर्विचार करना पड़ा।मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल पंजीकरण प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाना था। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी वर्ग के हित प्रभावित न हों, इसे ध्यान में रखते हुए आगे सभी पक्षों से विचार-विमर्श कर नई व्यवस्था तैयार की जाएगी। फिलहाल पंजीकरण का कार्य पुरानी व्यवस्था के अनुसार ही जारी रहेगा।