फिरोजाबाद। शिकोहाबाद स्थित जिला एवं सत्र न्यायालय ने डेढ़ वर्षीय मासूम आरव की हत्या के मामले में दोषी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। अदालत ने घटना को अत्यंत जघन्य मानते हुए यह निर्णय सुनाया। घटना के 41 दिन के भीतर फैसला आने को त्वरित न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब इस सजा पर नियमानुसार उच्च न्यायालय की पुष्टि होना शेष है।अभियोजन के अनुसार 30 मई को आरोपी महिला रति शर्मा पर विवाह का दबाव बना रहा था। महिला द्वारा प्रस्ताव अस्वीकार किए जाने के बाद उसने बदला लेने की नीयत से उसके डेढ़ वर्षीय पुत्र आरव को टॉफी दिलाने का बहाना बनाकर अपने साथ ले लिया। आरोप है कि सुनसान स्थान पर आरोपी ने बच्चे को कई बार जमीन पर पटक दिया, जिससे उसके सिर में गंभीर चोटें आईं और उसकी मृत्यु हो गई। वारदात के बाद आरोपी शव को घर के बाहर छोड़कर फरार हो गया था।पुलिस ने घटना की जांच के दौरान आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग को महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में एकत्र किया। बाद में आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। अभियोजन का कहना है कि वैज्ञानिक साक्ष्यों और तकनीकी प्रमाणों ने घटना की पुष्टि की, जिसके आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी माना।सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने आरोपी की मानसिक स्थिति ठीक न होने का तर्क रखा, लेकिन अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर इस दलील को स्वीकार नहीं किया। न्यायालय में सीसीटीवी फुटेज भी प्रस्तुत किया गया, जिसे अभियोजन ने मामले का महत्वपूर्ण प्रमाण बताया।जांच एजेंसियों ने मामले में तेजी से कार्रवाई करते हुए घटना के छह दिन के भीतर आरोप पत्र दाखिल कर दिया। इसके बाद अदालत ने लगातार सुनवाई कर सभी 13 गवाहों के बयान और जिरह पूरी कराई। गुरुवार को आरोपी को दोषी करार दिए जाने के बाद शुक्रवार को सजा के बिंदु पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के उपरांत मृत्युदंड का आदेश सुनाया गया।फैसले के बाद मृतक बच्चे की मां रति शर्मा ने न्यायालय के निर्णय पर संतोष जताते हुए कहा कि उनके बेटे के साथ हुई क्रूरता के लिए दोषी को कठोर दंड मिलना चाहिए था। वहीं अभियोजन पक्ष ने कहा कि त्वरित विवेचना, समयबद्ध आरोप पत्र और प्रभावी पैरवी के कारण कम समय में निर्णय संभव हो सका। विधि विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला गंभीर आपराधिक मामलों में समयबद्ध सुनवाई का महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है।