मुजफ्फरनगर। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय संख्या-3 के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने 10 साल पुराने मादक पदार्थ के मामले में आरोपी अशोक भारती को साक्ष्य और गवाहों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया। 35 पृष्ठ के फैसले में उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया और अदालतों के प्रशासनिक नियंत्रण से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवाल भी उठाए।मामला वर्ष 2015 का है। अशोक भारती को 21 अक्टूबर 2015 को भरतिया कॉलोनी के पास से 150 ग्राम चरस के साथ गिरफ्तार किए जाने की बात सामने आई थी। पुलिस ने अगले वर्ष आरोप पत्र दाखिल किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य और गवाह प्रस्तुत नहीं कर सका। करीब 10 वर्ष बाद अदालत ने आरोपी को दोषमुक्त कर दिया।फैसले में एडीजे ने अपनी अदालत से 97 मुकदमों की पत्रावलियां वापस लिए जाने के मामले का भी उल्लेख किया। रिपोर्ट के अनुसार 18 अगस्त को तत्कालीन जिला जज ने नौ आदेशों के जरिए इन मामलों को वापस लेकर दूसरी अदालतों में भेजा था। एडीजे ने इन मामलों में प्रशासनिक आदेशों के आधार और कानूनी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए।उन्होंने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 409 का उल्लेख करते हुए कहा कि जिन मामलों में सुनवाई शुरू हो चुकी हो, उन्हें बीच में वापस लेने के लिए कानूनी आधार स्पष्ट होना चाहिए। उन्होंने आदेशों में कारण दर्ज किए जाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।फैसले में न्यायाधीश की भूमिका और उसके अधिकारों से जुड़े सवाल भी उठाए गए। एडीजे ने टिप्पणी की कि न्यायाधीश का दायित्व न्याय करना है, लेकिन यदि उसी के साथ अन्याय हो तो वह न्याय की गुहार कहां लगाए। उन्होंने कानून और संविधान के शासन तथा प्रशासनिक आदेशों में स्पष्ट कारण दर्ज किए जाने की बात कही।करीब एक दशक तक चले मुकदमे पर भी फैसले में टिप्पणी की गई। लंबे समय तक चलने वाली न्यायिक प्रक्रिया से किसी आरोपी को होने वाली परेशानी का उल्लेख करते हुए अदालत ने त्वरित न्याय की आवश्यकता पर जोर दिया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Join WhatsApp Group