बिजनौर। नजीबाबाद क्षेत्र में दहेज के लिए गर्भवती पत्नी की हत्या के सनसनीखेज मामले में अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी पति को उम्रकैद की सजा सुनाई है। लंबे समय से चल रहे इस मुकदमे में अदालत के फैसले ने यह स्पष्ट कर दिया कि दहेज के नाम पर होने वाली हिंसा को कानून किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेगा।मामले के अनुसार, पीड़िता नसरीन का विवाह शमीम अहमद के साथ हुआ था। शादी के बाद से ही उस पर अतिरिक्त दहेज लाने का दबाव बनाया जाता रहा। परिजनों का आरोप है कि मांग पूरी न होने पर उसके साथ लगातार मारपीट और उत्पीड़न किया जाता था। स्थिति धीरे-धीरे इतनी गंभीर हो गई कि वर्ष 2019 में आरोपी ने अपनी गर्भवती पत्नी की गला दबाकर हत्या कर दी और घटना के बाद फरार हो गया।घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया, जहां वह तब से बंद था। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने गवाहों और दस्तावेजों के जरिए यह साबित किया कि हत्या दहेज की मांग पूरी न होने के कारण की गई थी।करीब सात साल बाद आए इस फैसले में अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई और उस पर आर्थिक दंड भी लगाया। फैसले के बाद पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है, वहीं यह निर्णय समाज के लिए एक सख्त चेतावनी माना जा रहा है कि दहेज जैसी कुप्रथा के खिलाफ कानून पूरी मजबूती से कार्रवाई करेगा।