मुजफ्फरनगर, 2 सितंबर 26। भूजल के अनधिकृत दोहन को लेकर प्रशासन ने सख्ती शुरू कर दी है। जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने सभी श्रेणी के भूजल उपभोक्ताओं को सात दिन के भीतर उत्तर प्रदेश भूगर्भ जल विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) अथवा पंजीकरण प्रमाण पत्र प्राप्त करने के निर्देश दिए हैं।जिलाधिकारी ने बताया कि उत्तर प्रदेश भूगर्भ जल (प्रबंधन एवं विनियमन) अधिनियम-2019, राष्ट्रीय हरित अधिकरण के दिशा-निर्देशों तथा पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों के तहत भूजल का दोहन भूगर्भ जल विभाग से एनओसी प्राप्त करने के बाद ही किया जा सकता है। केंद्रीय भूजल प्राधिकरण की वर्ष 2020 में जारी अधिसूचना के बाद यह व्यवस्था लागू है।उन्होंने कहा कि सभी उद्योग, व्यवसाय, अवसंरचनात्मक परियोजनाओं और अन्य भूजल उपभोक्ताओं को अपने भूजल दोहन के संबंध में निर्धारित प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके साथ ही वर्षा जल संचयन और भूजल रिचार्ज के लिए अपनाई गई व्यवस्था की वर्तमान स्थिति की रिपोर्ट और संबंधित अभिलेख भी सात दिन के भीतर जिला भूगर्भ जल प्रबंधन परिषद के नोडल अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करने होंगे।प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित अवधि में एनओसी या पंजीकरण प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं करने और वर्षा जल रिचार्ज व्यवस्था से संबंधित अभिलेख प्रस्तुत नहीं करने पर संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में अर्थदंड के साथ पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति भी लगाई जा सकती है। इसके अलावा विधिक कार्रवाई भी शुरू की जाएगी, जिसकी जिम्मेदारी संबंधित भूजल उपभोक्ता की होगी।भूजल से संबंधित किसी भी जानकारी या सहायता के लिए जिला भूगर्भ जल प्रबंधन परिषद, मुजफ्फरनगर के नोडल अधिकारी के कार्यालय अधिशासी अभियंता, भूगर्भ जल विभाग, खंड-सहारनपुर से संपर्क किया जा सकता है।