मुजफ्फरनगर। दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना दे रहे छात्र-छात्राओं और अन्य प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर मंगलवार को मुजफ्फरनगर में विरोध दर्ज कराया गया। अभिभावकों, विद्यार्थियों, शिक्षकों और अधिवक्ताओं ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की।ज्ञापन देने वालों ने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर पर शिक्षा व्यवस्था, भर्ती परीक्षाओं में कथित प्रश्नपत्र लीक समेत विभिन्न मुद्दों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाई जा रही थी। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और अन्य लोग शामिल थे। आरोप है कि 20 जुलाई को दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को धरनास्थल से हटाने के लिए बल प्रयोग किया।ज्ञापन में दावा किया गया कि कार्रवाई के दौरान छात्र-छात्राओं और बच्चों के साथ भी अनुचित व्यवहार किया गया। प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज करने और आंसू गैस के गोले छोड़ने के आरोप भी लगाए गए हैं। ज्ञापन देने वालों ने कहा कि इन आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जानी चाहिए।ज्ञापन में सोनम वांगचुक और अभिजीत दीपके का उल्लेख करते हुए कहा गया कि दोनों लंबे समय से शिक्षा और पर्यावरण से जुड़े विषयों पर कार्य करते रहे हैं। उनके नेतृत्व में छात्र-छात्राओं समेत अन्य लोग करीब 20 दिनों से जंतर-मंतर पर धरना और भूख हड़ताल कर रहे थे।प्रदर्शनकारियों की मांगों का जिक्र करते हुए ज्ञापन में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग का भी उल्लेख किया गया। ज्ञापन देने वाले लोगों का कहना था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों को शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने और विरोध दर्ज कराने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है।राष्ट्रपति से प्रकरण में हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा गया कि पुलिस कार्रवाई से जुड़े सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। जांच में किसी निर्दोष विद्यार्थी या प्रदर्शनकारी के साथ अन्याय की पुष्टि होने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए पीड़ितों को न्याय दिलाया जाए।ज्ञापन पर अंकुर बालियान, अर्जुन सिंह, अधिवक्ता नसीम हैदर और डॉ. फुरकान मालिक सहित विभिन्न अभिभावकों, छात्र-छात्राओं, शिक्षकों एवं अधिवक्ताओं के हस्ताक्षर बताए गए हैं।