मुज़फ्फरनगर पुलिस ने संगठित अपराध पर अंकुश लगाने की दिशा में बड़ी कार्रवाई करते हुए नौ आरोपितों के विरुद्ध उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि यह गिरोह लंबे समय से सुनियोजित ढंग से आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त था और गंभीर अपराधों के माध्यम से अवैध लाभ अर्जित कर रहा था। मुकदमा शहर कोतवाली में दर्ज किया गया है तथा मामले की जांच आगे बढ़ा दी गई है।पुलिस अभिलेखों के अनुसार गिरोह का नेतृत्व सोनू उर्फ फरीद निवासी ग्राम सिकरी, थाना भोपा करता था। उसके साथ पुन्ना उर्फ पुन्नन उर्फ पुन्नी उर्फ नजर, मुजफ्फर उर्फ काला, तनवीर, फैसल, मुन्ना उर्फ मुर्सलीन, जुनैद आलम, ताऊद और मुदस्सिर को भी नामजद किया गया है। आरोपित भोपा, चरथावल और नगर कोतवाली क्षेत्र के रहने वाले बताए गए हैं। पुलिस का दावा है कि सभी सदस्य एक-दूसरे के सहयोग से योजनाबद्ध तरीके से अपराध करते थे और गिरोह के रूप में कार्य कर रहे थे।प्राथमिकी के अनुसार आरोपितों के विरुद्ध हत्या, हत्या के प्रयास, रंगदारी, लूट, अवैध हथियार रखने, मारपीट तथा अन्य गंभीर धाराओं में पहले से अनेक मुकदमे विभिन्न थानों में दर्ज हैं। पुलिस ने उनके आपराधिक इतिहास का परीक्षण करने के बाद गैंगस्टर अधिनियम के अंतर्गत कार्रवाई को उचित पाया। अधिकारियों का कहना है कि गिरोह की लगातार आपराधिक गतिविधियों से कानून-व्यवस्था प्रभावित हो रही थी और समाज में असुरक्षा का माहौल पैदा हो रहा था।शहर कोतवाली प्रभारी निरीक्षक द्वारा दर्ज कराई गई रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि गिरोह के सदस्य आपराधिक घटनाओं को अंजाम देकर अवैध तरीके से धन अर्जित करते थे। पुलिस के अनुसार इनके विरुद्ध पहले दर्ज मामलों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर गैंगस्टर अधिनियम की कार्रवाई की गई है, जिससे गिरोह की गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।पुलिस अब गिरोह के आर्थिक तंत्र, सहयोगियों और अवैध संपत्तियों की भी पड़ताल कर रही है। जांच के दौरान यदि अपराध से अर्जित चल या अचल संपत्ति का पता चलता है तो उसके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने कहा कि जनपद में संगठित अपराध के विरुद्ध अभियान लगातार जारी रहेगा और ऐसे गिरोहों से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति के खिलाफ विधिसम्मत एवं कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।