मुजफ्फरनगर। न्यायालय में दाखिल की जाने वाली रिपोर्ट के एवज में रिश्वत मांगने के आरोप में थाना ककरौली के तत्कालीन उपनिरीक्षक के खिलाफ अदालत के आदेश पर मुकदमा दर्ज किया गया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के निर्देश के बाद पुलिस ने आरोपी दरोगा वीरेंद्र कुमार के विरुद्ध भ्रष्टाचार समेत अन्य आरोपों की जांच शुरू कर दी है। मामला एक अधिवक्ता की शिकायत से जुड़ा है।अधिवक्ता दिलबहार अली ने न्यायालय में दिए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया कि वर्ष 2023 के एक परिवाद में अदालत ने थाना ककरौली से नजरी रिपोर्ट मांगी थी। शिकायत के अनुसार चार मार्च 2024 को तत्कालीन उपनिरीक्षक वीरेंद्र कुमार उनके आवास पहुंचे। उस समय अधिवक्ता घर पर नहीं थे और उनकी माता मौजूद थीं।शिकायतकर्ता का आरोप है कि दरोगा ने नजरी रिपोर्ट उनके पक्ष में प्रस्तुत करने के बदले 25 हजार रुपये की मांग की। आरोप यह भी है कि रकम देने से इनकार करने पर उन्होंने अभद्र भाषा का प्रयोग किया और रिपोर्ट को लेकर दबाव बनाया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि दरोगा ने कथित रूप से यह दावा किया कि उनकी रिपोर्ट के बिना न्यायालय में कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकती।अधिवक्ता का कहना है कि उन्होंने पहले पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने थाना ककरौली को मुकदमा दर्ज कर विवेचना करने का आदेश दिया।अदालती आदेश के अनुपालन में पुलिस ने तत्कालीन दरोगा के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर लिया है। विवेचना की जिम्मेदारी उपनिरीक्षक अशोक कुमार को सौंपी गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रकरण की निष्पक्ष जांच की जाएगी और उपलब्ध साक्ष्यों तथा गवाहों के बयानों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी। मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
