नई दिल्ली। नीट परीक्षा से जुड़े विवाद को लेकर केंद्र सरकार और आंदोलनरत संगठन के प्रतिनिधियों के बीच शुक्रवार को कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में हुई वार्ता किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी। बैठक के बाद आंदोलनकारी पक्ष ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। वहीं, सरकार ने कुछ अन्य मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए शनिवार को दूसरे दौर की वार्ता का आश्वासन दिया है।करीब दस मिनट तक चली बैठक में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा और केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आंदोलनकारी संगठन के प्रतिनिधियों से बातचीत की। बैठक के बाद संगठन के पदाधिकारियों ने बताया कि उन्होंने सरकार के समक्ष तीन प्रमुख मांगें रखीं। इनमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, पेपर लीक प्रकरण से जुड़े मृतक अभ्यर्थियों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा तथा आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग शामिल है।आंदोलनकारी पक्ष का दावा है कि सरकार ने मृतक अभ्यर्थियों के परिजनों को आर्थिक सहायता देने और प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने के प्रस्ताव पर सैद्धांतिक सहमति जताई है। हालांकि, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के मुद्दे पर तत्काल निर्णय नहीं लिया गया। इस संबंध में सरकार ने शनिवार तक का समय मांगा है।संगठन के नेताओं ने कहा कि यदि अगली बैठक में उनकी प्रमुख मांग पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को देशव्यापी स्तर पर और तेज किया जाएगा। शनिवार को दोनों पक्षों के बीच फिर से बातचीत प्रस्तावित है, जिससे समाधान निकलने की उम्मीद जताई जा रही है।उधर, परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर लंबे समय से अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 26 दिन बाद अपना अनशन समाप्त कर दिया। केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात और लिखित आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने यह निर्णय लिया। उन्होंने बताया कि विभिन्न दलों के 65 सांसदों ने भी उनसे अनशन समाप्त करने का आग्रह करते हुए संसद में परीक्षा प्रणाली और नीट प्रकरण पर विस्तृत चर्चा कराने का भरोसा दिया है। वांगचुक की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें पहले अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां चिकित्सकीय देखरेख के बाद उन्होंने अपना अनशन समाप्त किया।