नई दिल्ली। कोयला ब्लॉक आवंटन से जुड़े बहुचर्चित मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को बड़ी कानूनी राहत प्रदान करते हुए उनके खिलाफ वर्ष 2015 में जारी समन को निरस्त कर दिया है। सर्वोच्च न्यायालय ने विशेष सीबीआई अदालत के उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें डॉ. सिंह समेत अन्य आरोपियों को तलब किया गया था। साथ ही अदालत ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए मामले का निस्तारण कर दिया।सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि उपलब्ध अभिलेखों और जांच के आधार पर ऐसा कोई पर्याप्त कारण नहीं था, जिसके चलते सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को अस्वीकार कर आगे की कार्यवाही जारी रखी जाती। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि मामले में संज्ञान लेने और आरोपियों को समन जारी करने का आधार विधिसम्मत नहीं था।यह मामला संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार के कार्यकाल के दौरान हुए कोयला ब्लॉक आवंटन से संबंधित था। वर्ष 2015 में विशेष सीबीआई अदालत ने डॉ. मनमोहन सिंह और पांच अन्य व्यक्तियों के खिलाफ समन जारी किए थे। इसके बाद इस आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी।मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने जांच पूरी करने के बाद अलग-अलग क्लोजर रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत की थीं। जांच एजेंसी को उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अभियोजन चलाने योग्य पर्याप्त सामग्री नहीं मिली थी, लेकिन विशेष अदालत ने उन रिपोर्टों को स्वीकार नहीं किया था।सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि विशेष अदालत द्वारा क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करने का निर्णय उचित आधार पर नहीं था। इसलिए वर्ष 2015 का आदेश निरस्त करते हुए सीबीआई की रिपोर्ट को स्वीकार किया जाता है और मामले में आगे की आपराधिक कार्यवाही समाप्त की जाती है।इस फैसले के साथ ही कोयला ब्लॉक आवंटन प्रकरण के इस हिस्से में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के विरुद्ध चल रही न्यायिक प्रक्रिया पर विराम लग गया है। अदालत के निर्णय को इस बहुचर्चित मामले में महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम माना जा रहा है।