मुजफ्फरनगर। नचिकेता स्कूल्स में गुरु पूर्णिमा का पर्व श्रद्धा, सम्मान और पारंपरिक गरिमा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर आयोजित विशेष प्रार्थना सभा में विद्यार्थियों ने अपने गुरुजनों के प्रति सम्मान प्रकट करते हुए पुष्प अर्पित किए और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व तथा जीवन में शिक्षा, संस्कार और अनुशासन की भूमिका से परिचित कराया गया।कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ हुआ। इसके बाद विद्यार्थियों ने गुरु के महत्व पर आधारित भाषण, काव्य पाठ और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। प्रस्तुतियों के माध्यम से उन्होंने गुरु को जीवन का मार्गदर्शक बताते हुए उनके प्रति अपनी श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त की।विद्यालय के शिक्षकों ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि गुरु केवल विषयों का ज्ञान ही नहीं कराते, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, नैतिक मूल्यों और जीवन की सही दिशा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षा के साथ-साथ अच्छे संस्कारों को अपनाने और अनुशासित जीवन जीने का संदेश दिया।विद्यालय की उपप्रधानाचार्या श्रीमती जसबीर कौर ने अपने संबोधन में कहा कि गुरु का स्थान समाज में अत्यंत सम्माननीय है। गुरु अपने ज्ञान, अनुभव और मार्गदर्शन से विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की नींव रखते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने शिक्षकों के प्रति सदैव आदर और विश्वास बनाए रखने का आह्वान किया।उपप्रधानाचार्या (प्रशासन) विक्की जैन ने विद्यार्थियों को गुरुजनों के आदर्शों का अनुसरण करने की प्रेरणा देते हुए कहा कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए ज्ञान के साथ अनुशासन, परिश्रम और संस्कार भी समान रूप से आवश्यक हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षकों द्वारा दिए गए मार्गदर्शन को जीवन में अपनाने का आग्रह किया।कार्यक्रम के समापन पर विद्यार्थियों ने अपने गुरुजनों के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और समर्पण की भावना बनाए रखने का संकल्प लिया। विद्यालय प्रबंधन ने बताया कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और गुरु-शिष्य परंपरा के प्रति आस्था विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।