मुजफ्फरनगर। जनपद में बढ़ते साइबर अपराधों के बीच थाना शाहपुर पुलिस ने एक बड़े ऑनलाइन ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए महिला समेत दो शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो खुद को सीबीआई और कस्टम अधिकारी बताकर लोगों को डराते-धमकाते थे और उनसे मोटी रकम ऐंठते थे। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से ठगी में इस्तेमाल किए गए कई अहम दस्तावेज और नकदी भी बरामद की है, जिससे इस पूरे गिरोह के काम करने के तरीके का खुलासा हुआ है।


पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस मामले की शुरुआत 4 अप्रैल को हुई जब शाहपुर क्षेत्र की निवासी एक युवती ने थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। पीड़िता ने बताया कि उसकी पहचान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से एक युवक से हुई थी, जिसने खुद को भरोसेमंद बताते हुए पहले उससे बातचीत बढ़ाई और फिर उसे गिफ्ट भेजने का झांसा दिया। कुछ समय बाद अलग-अलग मोबाइल नंबरों से कॉल कर आरोपियों ने खुद को कस्टम और सीबीआई अधिकारी बताते हुए पीड़िता को डराना शुरू कर दिया। उन्होंने फर्जी पहचान पत्र और नकली सर्च वारंट भेजकर उसे कानूनी कार्रवाई का भय दिखाया और इसी डर का फायदा उठाते हुए उससे कई बार में करीब पांच लाख रुपये अलग-अलग खातों में जमा करवा लिए।
शिकायत के आधार पर थाना शाहपुर पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की और सर्विलांस टीम के साथ मिलकर आरोपियों की तलाश में जुट गई। तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर की सूचना के आधार पर पुलिस ने हजूरनगर मार्ग से एक महिला और एक युवक को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उनकी पहचान रोजी निवासी दिल्ली और मंसूर अहमद निवासी बिजनौर के रूप में हुई है, जो वर्तमान में दिल्ली में रह रहे थे और वहीं से इस पूरे गिरोह को संचालित कर रहे थे।
गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से तीन डेबिट कार्ड, तीन मोबाइल फोन, एक फर्जी आईडी कार्ड, नकली सर्च वारंट की छायाप्रति, बैंक पासबुक, चेकबुक और दो लाख से अधिक की नकदी बरामद की है। बरामद सामान से साफ है कि आरोपी सुनियोजित तरीके से लोगों को अपने जाल में फंसाते थे और उन्हें सरकारी कार्रवाई का डर दिखाकर पैसे वसूलते थे।
प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे सोशल मीडिया के जरिए लोगों से संपर्क कर पहले उनसे रिश्ता बनाते थे, कभी बहन-भाई का रिश्ता जोड़कर विश्वास हासिल करते थे और फिर योजनाबद्ध तरीके से उन्हें ठगी का शिकार बनाते थे। उन्होंने यह भी बताया कि वे इस तरह की वारदातों को अंजाम देकर पहले भी कई लोगों से रकम ऐंठ चुके हैं।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों के नेटवर्क की गहन जांच की जा रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि इस गिरोह में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। साथ ही आरोपियों के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड को भी खंगाला जा रहा है ताकि पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके।

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