नई दिल्ली। देश में लग्जरी कारों के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिसमें बताया जा रहा है कि हजारों महंगी गाड़ियां भूटान के रास्ते भारत में लाई गईं और बाद में अलग-अलग राज्यों में फैला दी गईं। जांच एजेंसियों के अनुसार, यह पूरा खेल आयात नियमों को दरकिनार कर और फर्जी दस्तावेजों के सहारे संचालित किया गया।
सूत्रों के मुताबिक, इन गाड़ियों को पहले भूटान में रजिस्टर कराया गया या वहां के कागजों का इस्तेमाल किया गया, जिसके बाद इन्हें पूर्वोत्तर राज्यों—खासतौर पर असम और आसपास के इलाकों—के रास्ते भारत में प्रवेश दिलाया गया। इसके बाद ये वाहन देश के विभिन्न हिस्सों जैसे केरल, दिल्ली, महाराष्ट्र और अन्य बड़े शहरों तक पहुंचाए गए, जहां इन्हें प्रभावशाली लोगों और हाई-प्रोफाइल ग्राहकों को बेचा गया।
जांच में यह भी सामने आया है कि कई गाड़ियों को विशेष श्रेणी, जैसे डिप्लोमैटिक या अन्य छूट वाली कैटेगरी में दिखाकर भारी कस्टम ड्यूटी से बचाया गया। कुछ मामलों में पुराने सैन्य वाहनों के कागजों का दुरुपयोग करने की भी आशंका जताई जा रही है, ताकि गाड़ियों को वैध दिखाया जा सके।
अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती जांच में कुछ संदिग्ध गाड़ियां सामने आई थीं, लेकिन डिजिटल रिकॉर्ड और रजिस्ट्रेशन डेटा की गहन जांच के बाद यह संख्या बढ़कर 15 हजार से अधिक हो गई। इससे संबंधित विभागों में हड़कंप मच गया है और बड़े स्तर पर जांच अभियान शुरू कर दिया गया है।
कई राज्यों में संदिग्ध लग्जरी वाहनों की पहचान कर कार्रवाई भी शुरू हो चुकी है। कुछ स्थानों पर गाड़ियों को जब्त किया गया है, जबकि कई वाहन मालिकों को नोटिस भेजने की तैयारी है। इसके साथ ही, इस नेटवर्क से जुड़े दलालों और एजेंटों की तलाश भी तेज कर दी गई है।
जांच एजेंसियां अब भारत और भूटान के बीच समन्वय बढ़ाकर पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं, क्योंकि यह सिर्फ टैक्स चोरी का मामला नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले एक संगठित नेटवर्क का संकेत भी है।
