तेहरान/ईरान। मध्य-पूर्व के अहम देश ईरान में सरकार के खिलाफ चल रहा जनविरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। महंगाई, बेरोजगारी, राजनीतिक दमन और सामाजिक पाबंदियों के खिलाफ भड़का आक्रोश अब हिंसक रूप ले चुका है। राजधानी तेहरान सहित कई बड़े शहरों में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं।
ताज़ा रिपोर्टों के मुताबिक, अब तक 250 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों प्रदर्शनकारी और सुरक्षाकर्मी घायल बताए जा रहे हैं। मृतकों में युवक, महिलाएं और कुछ नाबालिग भी शामिल होने की खबर है। कई घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिन्हें स्थानीय अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
✅सुरक्षा बलों की सख्त कार्रवाई
प्रदर्शन को काबू में करने के लिए पुलिस और सुरक्षा बलों ने कई इलाकों में लाठीचार्ज, टियर गैस और लाइव फायरिंग का सहारा लिया। हालात बिगड़ने पर कुछ शहरों में सेना की तैनाती भी की गई है। सरकार ने सूचना के प्रसार को रोकने के लिए इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बंद कर दी हैं, जिससे आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है
✅हजारों गिरफ्तार, डर का माहौल
मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, अब तक 2,000 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। रात-रात भर छापेमारी, घरों से युवाओं को उठाए जाने और विरोध करने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की खबरें सामने आ रही हैं। इसके बावजूद लोग सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं।
✅महिलाएं और युवा आंदोलन की ताकत
इस विरोध की सबसे बड़ी तस्वीर यह है कि महिलाएं और युवा वर्ग खुलकर आगे आ रहे हैं। वे सामाजिक प्रतिबंधों और शासन की सख्ती को सीधे चुनौती दे रहे हैं। कई जगह सरकारी इमारतों और प्रतीकों को नुकसान पहुंचाए जाने की भी खबर है।
✅दुनिया की नजरें ईरान पर
ईरान में बिगड़ते हालात को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी सतर्क है। कई देशों और मानवाधिकार संगठनों ने हिंसा पर चिंता जताते हुए संयम बरतने की अपील की है
✅अभी थमने के आसार नहीं
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विरोध केवल तात्कालिक गुस्से का नतीजा नहीं है, बल्कि वर्षों से दबे असंतोष का विस्फोट है। अगर हालात ऐसे ही बने रहे, तो आने वाले दिनों में मौतों और गिरफ्तारियों का आंकड़ा और बढ़ सकता है।
👉 ईरान इस वक्त इतिहास के एक नाजुक मोड़ पर खड़ा है, जहां जनता और सत्ता के बीच सीधी टक्कर देश के भविष्य की दिशा तय कर सकती है।
