वेनेज़ुएला में सैन्य अभियान और राष्ट्रपति गिरफ्तारी के बाद अब अमेरिका की रणनीतिक नज़र ग्रीनलैंड पर टिकती दिख रही है। आर्कटिक क्षेत्र में स्थित इस विशाल द्वीप को अमेरिकी नेतृत्व राष्ट्रीय सुरक्षा और सामरिक हितों के लिए महत्वपूर्ण बता रहा है। इसी बीच डेनमार्क, जिसके अधीन ग्रीनलैंड अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र है, ने अमेरिका के रुख पर सख्त आपत्ति जताई है। डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने स्पष्ट कहा कि ग्रीनलैंड किसी सौदे, दबाव या नियंत्रण का विषय नहीं है और उसकी संप्रभुता से समझौता स्वीकार्य नहीं होगा। ग्रीनलैंड की स्थानीय सरकार ने भी अमेरिकी इरादों को ठुकराते हुए आत्मनिर्णय के अधिकार पर जोर दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि वेनेज़ुएला के बाद अमेरिका की यह सक्रियता आर्कटिक संसाधनों, दुर्लभ खनिजों और सैन्य ठिकानों से जुड़ी दीर्घकालिक भू-रणनीतिक नीति का हिस्सा है। यूरोपीय देशों ने डेनमार्क का समर्थन करते हुए तनाव के समाधान के लिए कूटनीतिक संवाद पर बल दिया है।
