मुजफ्फरनगर। जीएसटी व्यवस्था को व्यापारियों के लिए सरल बनाने और छोटे कारोबारियों को राहत देने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण बदलावों की सिफारिश की गई है। इनसे कर संबंधी प्रक्रियाओं का बोझ कम होने, रिफंड की प्रक्रिया में तेजी आने और कारोबारियों को अनावश्यक कानूनी उलझनों से राहत मिलने की उम्मीद है। प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री कपिलदेव अग्रवाल ने व्यापारियों की समस्याओं के समाधान को प्राथमिकता देने की बात कही।व्यापारियों के हितों से जुड़े इन प्रस्तावों में जीएसटी संबंधी मामलों में कानूनी कार्रवाई के प्रावधानों को अधिक व्यावहारिक बनाने, कुछ मामलों में जुर्माने की सीमा घटाने और छोटे कारोबारियों के लिए अनुपालन की प्रक्रिया सरल करने पर जोर दिया गया है। सामान्य जुर्माने की अधिकतम सीमा 25 हजार रुपये से घटाकर 10 हजार रुपये करने की सिफारिश भी की गई है।छोटे व्यापारियों को राहत देने के लिए विवरणी दाखिल करने में होने वाली देरी से जुड़े प्रावधानों को आसान बनाने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही ऑनलाइन व्यापार के माध्यम से दूसरे राज्यों में सामान बेचने वाले छोटे विक्रेताओं के पंजीकरण की प्रक्रिया सरल करने पर भी विचार किया गया है। इससे स्थानीय कारोबारियों को अपने उत्पादों का बाजार बढ़ाने में मदद मिल सकती है।जीएसटी रिफंड की प्रक्रिया को भी अधिक सुविधाजनक बनाने की दिशा में कदम उठाने की सिफारिश की गई है। इलेक्ट्रॉनिक नकदी खाते में उपलब्ध अतिरिक्त राशि की वापसी की प्रक्रिया को स्वचालित बनाने और आवेदन की पावती की समयसीमा 15 दिन से घटाकर 10 दिन करने का प्रस्ताव शामिल है। इसके अलावा, कुछ वस्तुओं और सेवाओं पर कर संबंधी बदलाव तथा छोटे कारोबारियों के लिए वैकल्पिक कर योजना को लेकर भी प्रस्ताव रखे गए हैं।व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने कारोबार से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका मानना है कि नियमों का पालन आसान होने से व्यापारियों का समय बचेगा और उन्हें कारोबार के विस्तार पर ध्यान देने का अवसर मिलेगा।इस दौरान फेडरेशन ऑफ मुजफ्फरनगर कॉमर्स सहित विभिन्न व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। इनमें पूर्व विधायक अशोक कंसल, भीमसेन कंसल, संजय मित्तल, कृष्णगोपाल मित्तल, राकेश त्यागी, जगमोहन गोयल और राजेश जैन सहित अन्य व्यापारी शामिल रहे।