मुजफ्फरनगर। बेरोजगार युवाओं और आर्थिक तंगी से जूझ रहे लोगों को नौकरी व आसान लोन का झांसा देकर ठगी करने वाले साइबर अपराधियों के एक संगठित गिरोह का साइबर क्राइम पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए गिरोह के दो शातिर सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया, जबकि उनके दो साथी अभी फरार हैं। पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दे रही है।पुलिस अधिकारियों के अनुसार आरोपी सोशल मीडिया और मोबाइल एप्लीकेशन के जरिए लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। “रिक्रूट रोजगार ऐप” के माध्यम से बेरोजगार युवाओं से संपर्क कर उन्हें आकर्षक नौकरी दिलाने का भरोसा दिया जाता था। इसके बाद रजिस्ट्रेशन, फाइल चार्ज और दस्तावेज सत्यापन के नाम पर ऑनलाइन रकम वसूली जाती थी। ठगी को असली दिखाने के लिए युवाओं को फर्जी नियुक्ति पत्र भी भेजे जाते थे।जांच में यह भी सामने आया कि यही गिरोह जरूरतमंद लोगों को कम ब्याज पर लोन दिलाने का झांसा देकर उनसे भी प्रोसेसिंग फीस और अन्य शुल्क के नाम पर पैसे ऐंठता था। इस तरह आरोपी एक ही व्यक्ति को अलग-अलग तरीकों से ठगी का शिकार बनाते थे।साइबर क्राइम टीम ने तकनीकी जांच और डिजिटल निगरानी के आधार पर शाहआलम उर्फ राजीव शर्मा उर्फ प्रदीप तथा संजीत कुमार उर्फ राहुल चौधरी उर्फ मनोज को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उनके कब्जे से पांच मोबाइल फोन, कई फर्जी अपॉइंटमेंट लेटर और साइबर ठगी से जुड़े दस्तावेज बरामद किए हैं।पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी फर्जी नाम और अलग-अलग पहचान का इस्तेमाल कर लोगों का विश्वास जीतते थे। ठगी के लिए विभिन्न राज्यों से जारी मोबाइल नंबर और सिम कार्डों का प्रयोग किया जा रहा था, ताकि पुलिस आसानी से उन तक न पहुंच सके।एसपी क्राइम इंदु सिद्धार्थ ने बताया कि प्रतिबिंब पोर्टल के जरिए काफी समय से इस गिरोह की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी। तकनीकी साक्ष्य मिलने के बाद कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने बताया कि गिरोह के खिलाफ अब तक करीब 16 साइबर ठगी की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। पुलिस अब फरार आरोपियों की तलाश के साथ-साथ गिरोह के बैंक खातों और नेटवर्क की भी जांच कर रही है।

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