मुजफ्फरनगर, 9 मई 2026। जिला न्यायालय मुजफ्फरनगर में द्वितीय शनिवार के अवसर पर राष्ट्रीय लोक अदालत का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें हजारों मामलों का आपसी सुलह-समझौते के आधार पर निस्तारण कर वादकारियों को त्वरित न्याय प्रदान किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ जनपद न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष बिरेन्द्र कुमार सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।अपने संबोधन में जनपद न्यायाधीश ने कहा कि लोक अदालत न्याय व्यवस्था का ऐसा प्रभावी माध्यम है, जहां हार-जीत का प्रश्न समाप्त हो जाता है और आपसी सहमति से विवादों का समाधान होने पर सामाजिक सौहार्द भी कायम रहता है। उन्होंने कहा कि लोक अदालत का उद्देश्य आमजन को सरल, सुलभ एवं त्वरित न्याय उपलब्ध कराना है। साथ ही बैंक अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि ऋण संबंधी मामलों में अधिकतम राहत देकर प्रकरणों का निस्तारण सुनिश्चित करें।प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय खलीकुज्जमा ने पारिवारिक विवादों को समझौते के आधार पर सुलझाने पर जोर दिया। राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान परिवार न्यायालयों में 64 मामलों का आपसी सहमति से निस्तारण किया गया।लोक अदालत के नोडल अधिकारी एवं अपर जिला जज रवि कुमार दिवाकर ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत विवादों के त्वरित और सौहार्दपूर्ण समाधान का सशक्त माध्यम बन चुकी है तथा समाज के कमजोर और वंचित वर्ग के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है।जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं सिविल जज (सीडी) डॉ. सत्येन्द्र कुमार चौधरी ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 4,32,584 मामलों का निस्तारण किया गया। वहीं मोटर दुर्घटना दावा प्राधिकरण की पीठासीन अधिकारी आदेश नैन द्वारा 56 वादों का निस्तारण करते हुए 6 करोड़ 11 लाख 36 हजार 627 रुपये का प्रतिकर प्रदान किया गया।जनपद न्यायालय के विभिन्न न्यायालयों में 6,190 शमनीय फौजदारी मामलों का निस्तारण कर 7 लाख 27 हजार 840 रुपये का अर्थदंड वसूला गया, जबकि 33 दीवानी मामलों का भी निस्तारण किया गया। वहीं एनआई एक्ट न्यायालयों में 31 मामलों के समाधान के साथ 2 करोड़ 97 लाख 44 हजार 389 रुपये की धनराशि वसूल की गई।जिलाधिकारी उमेश कुमार मिश्रा के नेतृत्व में राजस्व अधिकारियों ने 15,876 राजस्व मामलों का निस्तारण करते हुए 4 करोड़ 54 लाख 69 हजार 965 रुपये का राजस्व वसूला। इसके अलावा विभिन्न बैंकों द्वारा 384 ऋण मामलों का निस्तारण कर लगभग 5 करोड़ 62 लाख 86 हजार रुपये का सेटलमेंट किया गया।राष्ट्रीय लोक अदालत में जिला बार संघ, सिविल बार संघ, न्यायिक अधिकारियों, बैंक अधिकारियों एवं बड़ी संख्या में वादकारियों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम के दौरान न्यायिक अधिकारियों ने लोक अदालत को न्याय व्यवस्था को सरल और जनसुलभ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।

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